पठानकोट: भारत में गाय को मां का दर्जा दिया गया है। ऐसा कहा भी जाता है कि गौशाला के अंदर 33 करोड़ देवी-देवता रहते हैं। भारत की केंद्र सरकार गाय को नेशनल मदर का दर्जा देने की तैयारी भी कर रही है परंतु यदि जमीनी हकीकत की बात करें तो गायों का झुंड सड़कों पर घूम रहा है।
जहां भी इस गौशाला की देखभाल के लिए गौशालाएं बनाई गई हैं वहां पर ऐसी गाय को नजरअंदाज किया जा रहा है। मवेशियों की ठीक से देखभाल नहीं की जा रही जिसके चलते सर्दियों के दिनों में सही खाना और सही देखभाल न मिलने के कारण से मवेशी मर रहे हैं।
कुछ ऐसी ही तस्वीरें जम्मू-कश्मीर के कीरन गंडियाल गांव से सामने आई हैं। यह गांव पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर है जहां मवेशी तस्कर मवेशियों को बचाकर एक ही गौशाला में रख रहे हैं लेकिन इस गौशाला में मवेशियों की जिंदगी मौत से भी बदतर है। ऐसे ही एक एनआरआई ने इस गौशाला का जायजा लिया।
मौके पर पहुंचकर गौशाला का मुआयना किया, गौशाला की सफाई की और मवेशियों की सेवा की। इस बारे में एनआरआई ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक ओर देश की सरकार गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की बात कर रही है परंतु माता के देश के हालात पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा। इस गौशाला में गायें कीचड़ में रह रही है। ठंड के कारण वो बीमार हो रही हैं उनकी मौत हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस जगह पर गायों के लिए न तो सही खाना और न ही सही देखभाल मिल पा रही है। सरकार से अपील करते हुए एनआरआई ने कहा कि स्लॉटरहाउस खोलकर उन्हें मार देना चाहिए ताकि वो हर दिन मरने की जगह एक बार शांति से मर पाएं।