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रेंडक्रॉस सोसाइटी के सौजन्य से बल्ह खालसा में मनाया वन महोत्सव, भुट्टो रहे मुख्यातिथि

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पेड़ लगाना जरूरी, लेकिन उसे कामयाव करना जीवन का होना चाहिए मकसद: देवेन्द्र भुट्टो
ऊना/सुशील पंडित: कुटलैहड़ विस क्षेत्र की ग्राम पंचायत बल्ह खालसा में राज्य रेंडक्रॉस सोसाइटी द्वारा बन महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में कुटलैहड़ विस क्षेत्र के विधायक देवेन्द्र भुट्टो ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। बहीं राज्य रेंडक्रॉस सोसाइटी के प्रदेश संयोजक सुरिन्दर ठाकुर, डीएफओ ऊना सुशील राणा, एसडीएम बंगाणा मनोज कुमार ,तहसीलदार बंगाणा रोहित कँवर विशेष रूप से उपस्थित रहे। रेडक्रास सोसायटी के सौजन्य से विधायक ने कुछ जरूरतमंद लोगो को व्हील चेयर भी प्रदान की। कार्यक्रम में पहले नेहरू युवक मंडल बल्ह खालसा द्वारा विधायक का कार्यक्रम में पहुंचने पर स्वागत किया  और उपरांत मुख्यतिथि द्वारा फलदार पौधा लगया गया। बहीं जनसभा को सम्बोधित करते हुए भुट्टो ने कहा कि यूँ तो हम बहुत से त्यौहार मनाते हैं लेकिन जब बात आती है पृथ्वी को बचाने की तो ऐसे त्यौहारों की संख्या बहुत कम है। वन महोत्सव एक बहुत ही मह्त्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है। यह एक ऐसा त्यौहार है जो जुलाई के महीने में आता है। इस त्यौहार की सबसे अच्छी बात यह है कि लोगों ने वन महोत्सव को काफी गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है। 
भुट्टो ने कहा कि हिमाचल प्रदेश क्लीन ओर ग्रीन के नाम से जाना जाता है और हिमाचल की सुंदरता को बनाए रखने के लिए हर व्यक्ति को हर वर्ष पांच अलग अलग पौधे लगाने चाहिए। क्योंकि आज सब पेड़ लगाने के महत्व को समझ चुके हैं और यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि पेड़ लगाना राज्य को हरा-भरा और खुशहाल बनाए रखने के लिए कितना अधिक जरुरी है। हर साल पूरे राज्य में हजारों  पेड़ लगाए जा चुके हैं इस त्यौहार पर लेकिन यह संख्या बहुत कम है। कहना गलत नहीं होगा  कि हमें बहुत सारे पेड़ और पौधे लगाने की जरूरत ताकि ग्लोबल वार्मिंग को कम किया जा सके।
 भुट्टो ने कहा कि जब हम पौधा लगाते हैं तो उसकी देखभाल करना भी हमारा दायित्व बनता है ताकि वड़ा होकर पौधा हमें फल घास दवाई प्रदान कर सके। खास बात यह है कि यह त्यौहार पूरे देश में बहुत ही बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इतना ही नहीं, स्थानीय प्रजातियों और वन विभाग जैसी विभिन्न प्रसिद्ध एजेंसियों भी इस काम में काफी सहयोग दे रही है और इसी कारण अब तक विभिन्न प्रजातियों के हजारों पौधे लगाए जा चुके हैं। और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि हम सभी जानते हैं कि हमारी पृथ्वी को और बहुत से पेड़ लगाने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि इस त्यौहार के कारण ही अब लोग घरों, दफ्तरों, स्कूल, कॉलेजों आदि में बहुत ही बड़ी संख्या में पेड़ लगाने लगे हैं। इस मौके पर कुटलैहड़ कांग्रेस अध्यक्ष राम आसरा शर्मा,प्रदेश प्रवक्ता बिजय डोगरा, रेंज ऑफिसर अश्वनी कुमार, बीडीसी सदस्य अच्छरो बीबी,स्थानीय प्रधान उपप्रधान, नेहरू युवक मण्डल सदस्य व अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। 

आखिरकार वन महोत्सव क्यों हमारे जीवन मे है महत्वपूर्ण: सुशील राणा
जिला वन परिक्षेत्र अधिकारी ऊना सुशील राणा ने कहा कि यह त्यौहार मनाना कई कारणों से जरुरी है क्योंकि यह सीधे तौर पर मानव के अस्तिव से, हमारी पृथ्वी और पर्यावरण से जुड़ता है। तेजी से बढती आबादी के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ चुका है और यह बहुत जरुरी हो चुका है कि विकास और पर्यावरण के बीच बहुत ही सुंदर संतुलन बनाया जा सके, उन्होंने कहा कि निर्माण और अन्य उद्देश्यों को पूरा करने के लिए तेजी से बहुत सा पानी उपयोग किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कारखानों से बहुत सारा पानी बिना उपचारित किये छोड़ा जा रहा है। पर्यावरण को बचाने के लिये जरुरी है कि सभी लोग समान रुप से सहयोग करें। पेड़ हमारे पर्यावरण का आधार हैं ।
 रेडक्रॉस सोसाइटी का मतलब ,समाज सेवा व जनता को जागरूक करना: सुरिंदर ठाकुर
राज्य रेडक्रॉस सोसाइटी के प्रदेश संयोजिक सुरिंदर ठाकुर ने कहा कि रेंडक्रॉस सोसाइटी का मतलब जनता को अच्छे कार्यो के लिए जागरूक करना और पीडित परिवारों की मदद करना । ठाकुर ने कहा कि रेंडक्रॉस सोसाइटी ने वन महोत्सव को गोद लेकर हर व्यक्ति को बन महोत्सव के बारे में विस्तार से बताना ओर वन महोत्सव को सफल बनाना है।
उन्होंने कहा कि वन-महोत्सव के दौरान पेड़ लगाने से सुख मिलता है और अधिक पेड़ लगाने से अधिक ईंधन प्राप्त होता है। मवेशियों के लिए भरपूर मात्रा में चारे की पत्तियाँ प्राप्त होती है।अधिक पेड़ लगाने से अधिक ऑक्सीजन मिलती है। ठाकुर ने कहा कि पेड़ लगाने से न केवल पक्षियों बल्कि जानवरों को रहने के आदर्श स्थान मिल जाता है। अधिक छायादार वृक्ष होने से गर्मी कम लगती है और तापमान स्थिर रहता है।फलों और सब्जियों का उत्पादन बढ़ता है। इसके अलावा देश के संभावित खाद्य संसाधनों को शानदार तरीके से जोड़ना ताकि भोजन की कमी ना हो।  वन-महोत्सव लोगों के बीच पेड़ों के प्रति आदर और प्यार बढ़ाने के लिए भी काफी सहायक है।

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