युवा भाजपा नेता अरुण कौशल ने कांग्रेस की मंशा पर उठाए सवाल
ऊना/सुशील पंडित: केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को नया नाम विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) देने के फैसले का विरोध कांग्रेस द्वारा किया जा रहा है। युवा भाजपा नेता अरूण कौशल ने इस विरोध की असली वजह पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि कांग्रेस को मनरेगा में प्रभु राम के पवित्र नाम के जुड़ने से गहरी दिक्कत है, और यही कारण है कि वे इस बदलाव का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विरोध मनरेगा के नाम बदलाव से नहीं, बल्कि उसमें प्रभु राम के नाम के शामिल होने से है।
प्रभु राम का नाम सनातन संस्कृति, न्याय, समानता और रामराज्य के आदर्शों का प्रतीक है, लेकिन कांग्रेस इसे राजनीतिक चश्मे से देख रही है।यदि कांग्रेस को वास्तव में ग्रामीण भारत की चिंता होती, तो वे योजना की मूल भावना – गरीबों को रोजगार गारंटी – को मजबूत करने पर ध्यान देते, न कि नाम पर राजनीति करते।केंद्र सरकार का यह कदम विकसित भारत के संकल्प को सनातन मूल्यों से जोड़ता है, जो एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल है। लेकिन कांग्रेस की राम-विरोधी मानसिकता इस बदलाव को पचा नहीं पा रही है।
इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने हमेशा सनातन संस्कृति और राम के आदर्शों को दरकिनार करने की कोशिश की है, और यह विरोध उसी सोच का हिस्सा है। देश के करोड़ों रामभक्तों को कांग्रेस की इस राम-विरोधी राजनीति से गहरा दुख पहुंचा है। कौशल ने आगे कहा कि प्रभु राम का नाम किसी योजना में जोड़ना सम्मान की बात है, न कि विरोध का विषय।