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महाविद्यालय ऊना में चल रही दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन

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ऊनासुशील पंडित: राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय ऊना में चल रहे दो दिवसीय “एक्सप्लोरिंग द लिटरेरी स्पेस एज ए ब्रिज एक्रास डिस्पिलिन” विषयक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे और समापन दिवस शनिवार को भौतिक माध्यम (ऑफ़लाइन) से एक मुख्यवक्ता डॉ. नीना गुप्ता विज (वरिष्ठ सहायक प्रोफ़ेसर, अंग्रेज़ी विभाग, केन्द्रीय विश्वविद्यालय जम्मू) और ऑनलाइन माध्यम के द्वारा दो आमंत्रित मुख्यवक्ता प्रोफ़ेसर वंदना शर्मा (केन्द्रीय विश्वविद्यालय जम्मू) और डॉ० सयंतन चक्रवर्ती (सहायक प्रोफ़ेसर, बीट्स पिलानी-दुबई कैंपस) ने अपने-अपने विचार प्रतिभागियों से सांझा किये।

प्रख्यात मुख्यवक़्ता डॉ. नीना गुप्ता विज ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि कैसे डिजिटल तकनीक पारंपरिक और आधुनिक संचार के बीच के अंतर को जोड़ती है, जिससे साहित्य दोतरफा आदान-प्रदान बन जाता है। उन्होंने संस्कृति के वैश्वीकरण और सामाजिक प्रथाओं को आकार देने में डिजिटल मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला। बॉडरिलार्ड के सिमुलक्रा और सिमुलेशन और अतियथार्थवाद पर उनके विचारों ने चर्चा में एक दिलचस्प परत जोड़ दी।

प्रोफ़ेसर वंदना शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि साहित्यिक कार्य विभिन्न संस्कृतियों के बीच एक सेतु का काम करते हैं। यह अवधारणा साहित्य में ऐसी रचनाओं और लेखकों का संदर्भ देती है जो सांस्कृतिक अंतराल को पाटने का प्रयास करते हैं, विभिन्न संस्कृतियों के अनुभवों, मूल्यों और दृष्टिकोणों को समझने और साझा करने का माध्यम बनते हैं।

डॉ० सयंतन चक्रवर्ती ने कहा कि चिकित्सा मानविकी और अंतःविषयता चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दृष्टिकोण न केवल चिकित्सा पेशेवरों को अधिक संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण बनाता है, बल्कि रोगियों की देखभाल को भी संपूर्ण रूप से देखता है। यह आवश्यक है कि चिकित्सा शिक्षा और अभ्यास में मानविकी और विभिन्न अन्य विषयों का एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाए, ताकि चिकित्सा का मानवीय पक्ष प्रबल हो और स्वास्थ्य सेवा अधिक प्रभावी और न्यायसंगत बन सके।

भोजनावकाश के बाद तकनीकी सत्रों का आगाज हुआ जिनमें भौतिक तथा ऑनलाइन मोड में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने-अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रतिवेदन संगोष्ठी की समन्वयक अनीता सैनी ने प्रस्तुत की।

इस अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन समारोह की मुख्यातिथि भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी डॉ० रंजना चौहान (पुलिस उपमहानिरीक्षक क़ानून-व्यवस्था शिमला) रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि कैसे साहित्य सीमाओं को पार करता है और ज्ञान के सभी क्षेत्रों को जोड़ता है। उन्होंने इसकी सार्वभौमिक प्रासंगिकता, सहानुभूति को बढ़ावा देने की साहित्यिक शक्ति को विषयों और व्यक्तियों के बीच के अंतर को पाटने में साहित्य की भूमिका पर प्रकाश डाला।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीता शर्मा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में, ज्ञान को अलग-अलग अनुशासनों में बाँटकर देखना पर्याप्त नहीं है। हमें एक अंतःविषय दृष्टिकोण अपनाना होगा, जहाँ साहित्य एक पुल की तरह कार्य करता है। यह पुल हमें न केवल विज्ञान और मानविकी, बल्कि समाज, कला और संस्कृति के बीच भी संवाद स्थापित करने की क्षमता प्रदान करता है।

महाविद्यालय के उपप्राचार्य पुनीत प्रेम कंवर ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का महाविद्यालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभाग लेने पर आभार व्यक्त किया।

इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन से पूर्व सभी उपस्थित प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र बांटे गए। इस मौक़े पर राजकीय महाविद्यालय खड्ड ऊना के प्राचार्य डॉ. राजेन्द्र शर्मा, राजकीय महाविद्यालय चौकी मनियार ऊना के प्राचार्य डॉ. बलविंदर सिंह राणा, राजकीय महाविद्यालय ऊना के पूर्व प्राचार्य डॉ सतीश कुमार बंसल, वरिष्ठ एसोसियेट प्रोफ़ेसर रविराज सहित बड़ी संख्या में शैक्षणिक एवं ग़ैर-शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित रहे।

इस संगोष्ठी में देश-विदेश के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जो महाविद्यालय के लिए एक गर्व का विषय है।

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