नए कार्यों की उम्मीद नहीं, कम से कम पूर्व सरकार के अधूरे काम पूरे करे व बंद कार्यालयों को शीघ्र खोले सरकार
ऊना/सुशील पंडित: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु के एक दिवसीय ऊना जिला प्रवास पर पूर्व मंत्री व कुटलैहड़ भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र कंवर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का ऊना में स्वागत है, लेकिन उनके बार-बार आने के बावजूद कुटलैहड़ क्षेत्र को आज तक कोई ठोस लाभ नहीं मिल पाया है। वीरेंद्र कंवर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से कुटलैहड़ में विकास पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। जो काम पिछली भाजपा सरकार के समय शुरू हुए थे, वे भी आज अधर में लटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की नीतियों और उदासीनता के कारण क्षेत्र की जनता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है और लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
कंवर ने तंज कसते हुए कहा कि मौजूदा सरकार से कुटलैहड़ के लिए किसी नई परियोजना की उम्मीद करना भी अब व्यर्थ है। लेकिन मुख्यमंत्री से कम से कम यह अपेक्षा जरूर है कि वे पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू किए गए जनहित के विकास कार्यों को पूरा करवाएं और जनता की सुविधाओं के लिए खोले गए सरकारी कार्यालयों को दोबारा बहाल करें। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विकास कार्य अधूरे पड़े हैं और कई संस्थान बंद कर दिए गए हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बंद या ठप्प पड़े प्रमुख विकास कार्य
* थाना कलां व बंगाणा अस्पताल
* बंगाणा स्कूल की साइंस लैब
* कॉलेज का इंडोर स्टेडियम
* शिवा प्रोजेक्ट
* क्षेत्र की पर्यटन विकास योजनाएँ
* अटल आदर्श विद्यालय
* आजीविका भवन
* सेंटर ऑफ एक्सीलेंस डेयरी, बसाल
* गोकुल ग्राम थानाकलां
* बरनोह मुर्राह प्रजनन फार्म
* वेटनरी सुविधाओं में भारी कटौती
जनहित के कई संस्थान भी बंद
* थाना कलां बिजली विभाग का कार्यालय
* कृषि मृदा संरक्षण डिवीजन
* एसएमएस ऑफिस बसाल
* बीहडू कानूनगो सर्कल
* प्रोइयाँ-बल्ह-क्यारियाँ पटवारखाने
* कई वेटनरी अस्पताल व उपकेंद्र
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित
वीरेंद्र कंवर ने कहा कि क्षेत्र में कई प्राथमिक विद्यालयों में पर्याप्त स्टाफ नहीं है, कई स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद पड़े हैं और कर्मचारियों के साथ भी अनावश्यक उत्पीड़न किया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे अपने ऊना प्रवास के दौरान कुटलैहड़ की अनदेखी पर संज्ञान लें और बंद पड़े विकास कार्यों को जल्द पूरा करवाने के साथ-साथ बंद किए गए सरकारी संस्थानों को पुनः बहाल करने के निर्देश दें, ताकि क्षेत्र की जनता को राहत मिल सके।