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तुम्हारे मन का परिवर्तन ही तुम्हारे दुखों का अंत है- स्वामी ज्ञानानंद

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दुख में यदि प्रभु याद आएं तो यह भी शुभ संकेत है- बाबा बाल 
ऊना/सुशील पंडित: श्री राधाकृष्ण मंदिर कोटला कलां में 13 दिवसीय धार्मिक महासम्मेलन चल रहा है। इसमें गीता के अमृत ज्ञान की वर्षा करते हुए शनिवार को गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि गीता में लिखा है कि क्रोध तब पुण्य बन जाता है जब वह धर्म और मर्यादा के लिए किया जाए और सहनशीलता तब पाप बन जाती है जब वह धर्म और मर्यादा को बचा ना पाए। अक्सर मनुष्य अपने दुखों और पीड़ा के लिए संसार को दोष देता है। यदि हम अपने मन को समझा लें और स्वयं में परिवर्तन करें तो उन दुखों का अंत हो जाता है। दुखों से पार वही मनुष्य पहुंचता है जो गीता के अनुसार अपने जीवन को ढाल लेता है। स्वामी जी कहते हैं कि गीता के अनुसार केवल डरपोक और कमजोर लोग ही चीजों को भाग्य पर छोड़ते हैं लेकिन जो मजबूत और खुद पर भरोसा करने वाले होते हैं वे कभी भी नियति या भाग्य पर निर्भर नही रहते। योगेश्वर श्रीकृष्ण की अमृतवाणी कहती है कि परेशानी में अगर कोई तुमसे सलाह मांगता है तो उसे सलाह के साथ अपना साथ भी देना क्योंकि सलाह गलत हो सकती है परंतु साथ नहीं। शरीर नश्वर है पर आत्मा अमर है। यह तथ्य जानने पर भी व्यक्ति अपने इस नश्वर शरीर पर घमंड करता है जो कि निरर्थक है। शरीर पर घमंड करने की बजाय मनुष्य को सत्य स्वीकार करना चाहिए। प्रभु श्रीकृष्ण कहते हैं कि तुम अपने आपको भगवान को अर्पित कर दो। यही सबसे उत्तम सहारा है। जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त है।

कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज ने कहा कि प्रभु में जो लीन हो जाता है वह संसार के दुखों से मुक्त होना शुरू हो जाता है। हमने यह देखा है कि जब व्यक्ति पर दुख आते हैं तो वह ईश्वर को याद करता है। दुखों का आना भी भाग्यशाली बन जाए यदि मनुष्य उन्हें ठीक ठीक समझकर प्रभु की खोज में जुट जाए। यह एक प्रमाणिक तथ्य है कि असंख्य मनुष्यों को उसी समय ईश्वर से लगन लगी है जब वे भयंकर विपदाओं से घिरे थे। उस समय उनका मन प्रभु की भक्ति के लिए उपजाऊ भूमि तैयार करता है। ठीक उसी समय धर्म के बीज भक्तों के मन में अंकुरित होने लगते हैं। सतत भक्ति, ईश्वर में अपार श्रद्धा और समर्पण जारी रहे तो मनुष्यों के मन में ईश्वर के फूल खिल ही जाते हैं।

महासम्मेलन के कार्यक्रमः
4 फरवरी दोपहर 1 से 4 गीता पर मनीषी ज्ञानानंद जी के प्रवचन
4 और 5 फरवरी को ही दोपहर बाद ही रसिका पाल कृपा पात्र चित्र विचित्र जी द्वारा भजन
छह फरवरी को अल्का गोयल द्वारा भजन गायन दोपहर 1 से 4
7 से 13 फरवरी दोपहर ठाकुर कृष्ण चंद शास्त्री वृंदावन वालों द्वारा श्रीमद् भागवत कथा
इसके अलावा 4 से 13 फरवरी तक प्रतिदिन सुबह 9 से 12 रासलीला का आयोजन होगा।

आचार्य हेमानंद आज श्री राधा कृष्ण मंदिर कोटला कलां में प्रवचन देंगे
श्री राधा कृष्ण मंदिर कोटला कलां में चल रहे विशाल धार्मिक महासम्मेलन में रविवार को सदगुरु श्री श्री 1008 बाबा सुग्रीवानंद जी महाराज के परम शिष्य आचार्य श्री हेमानंद जी महाराज जी प्रवचन देने आ रहे हैं। राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज के सानिध्य में प्रतिवर्ष यह महासम्मेलन कराया जाता है। इसमें देश भर के मनीषी और कथा वाचक अपने प्रवचन के लिए निरंतर पहुंच रहे हैं।

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