जिन्हें बताया माफिया 24 घंटे में कैसे बन गए अपने कार्यकर्ता
ऊना/सुशील पंडित: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं ऊना विधानसभा क्षेत्र के विधायक सतपाल सिंह सत्ती, जिला महामंत्री पीएल भारद्वाज, मंडल अध्यक्ष राहुल देव शर्मा, देवेंद्र कौशल और प्रदेश मीडिया सह प्रभारी राजकुमार पठानिया,वरुण मेहन, दिनेश कुमार, खामोश जेतिक ने पूर्व विधायक सतपाल सिंह रायजादा पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि होटल में हुए गोलीकांड को कांग्रेस नेता ने अपनी बची-खुची राजनीति चमकाने का हथियार बना लिया है। भाजपा नेताओं ने प्रैस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि मृतक युवक के परिवार और घायलों के प्रति उनकी पूरी संवेदनाएं हैं। वह इस घटनाक्रम में घायल हुए युवकों के जल्द स्वस्थ होकर घर लौटने की भी कामना करते हैं। लेकिन इस दर्दनाक घटना को राजनीति का मंच बनाना कांग्रेस की अवसरवादी सोच को उजागर करता है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि रायजादा ने 20 नवंबर को गोलीकांड के बर्फ कहा था कि ये सब माफिया लोग हैं, ये किसी के नहीं होते, लेकिन 22 नवम्बर को रायजादा ने मृतक और हत्यारोपियों को अपने कार्यकर्ता बता दिया। भाजपा ने सवाल उठाया कि माफ़िया से ऐसी कौन-सी धमकी मिली या कौन-सा दबाव पड़ा कि रायजादा को अपने बयान पर पलटी मारनी पड़ी? जनता यह जानने को लेकर उत्सुक है कि आखिर पूर्व विधायक की कौन सी ऐसी पोल खुलने वाली थी, जिसे घबराकर उन्होंने अपना बयान बदल दिया।
भाजपा नेताओं ने पूर्व विधायक से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि उनके होटल में मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं को किसने बुलाया था। क्या वे किसी जन्मदिन पार्टी का हिस्सा थे, या मात्र ग्राहक के रूप में खाना खाने आए थे? भाजपा ने आरोप लगाया कि यदि रायजादा अपने होटल को माफिया गतिविधियों का अड्डा बनाकर रखते हैं, तो फिर जनता को साफ-साफ बता दें कि वहां आम ग्राहकों के लिए जगह है भी या नहीं। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस नेता ने अपने आर्थिक और राजनीतिक लाभ के लिए युवाओं को गलत रास्ते पर धकेला और उन्हें संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने तक को उकसाया। जिसका नतीजा यह रहा कि एक युवक की जान चली गई, जबकि दो जिंदगी और मौत के बीच पीजीआई चंडीगढ़ में झूल रहे हैं
भाजपा ने आरोप लगाया कि गोली कांड की पूरी जिम्मेदारी प्रदेश की सरकार और निकम्मे प्रशासन की ही बनती है और समय आने पर उन्हें इसके लिए जवाब देना पड़ेगा। मानहानि के मामले में सत्ती ने पलटवार करते हुए कहा कि “मानहानि उसी की होती है जिसका समाज में सम्मान और ईमान हो।” भाजपा नेताओं ने सवाल दागा कि अक्टूबर 2022 में पूर्व विधायक ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए चुनाव आयोग को दिए अपने शपथ पत्र में कुल संपत्ति 10 करोड़ रुपये बताई। इसके बाद उन्होंने मई 2024 में लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए चुनाव आयोग को एक और शपथ पत्र दिया जिसमें उनकी संपत्ति 15 करोड़ बताई।
उन्होंने कहा कि बात यहीं खत्म नहीं हो जाती इसी अवधि के दौरान पूर्व विधायक ने अपना 2 करोड़ 83 लख रुपए का लोन भी कांगड़ा बैंक को चुकता किया। अब संपत्ति का बढ़ा हुआ 5 करोड़ और चुकाए गए लोन की 2 करोड़ 83 लाख रुपए की राशि, कुल 7.83 करोड रुपए पूर्व विधायक को कहां से आए इसका उन्होंने आज तक कोई भी सोर्स नहीं बताया। उन्होंने कहा कि यह सारी राशि असामाजिक तत्वों से ही जुटाई गई है, अन्यथा पूर्व विधायक जनता के बीच साबित करें कि उन्हें डेढ़ साल में 7.83 करोड़ रुपया कहां से आया। उन्होंने कहा कि कांगड़ा बैंक से विधायक का 3 करोड़ से अधिक का लोन माफ कर दिया गया और यदि पूर्व विधायक की सरकार में इतनी ही चलती है तो विधानसभा क्षेत्र के कई लोगों को कांगड़ा बैंक द्वारा लोन नहीं भर पाने के कारण नोटिस थमाए जा रहे हैं, इन लोगों के लिए पूर्व विधायक ढाल बनकर सामने आए और सरकार से इन लोगों का भी लोन माफ करवाकर उन्हें चिंता मुक्त करें।
सत्ती पर लगाए गए बेनामी संपत्ति के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि “जिनका खुद का धंधा बेनामी संपत्ति पर चलता है, वही दूसरों पर उंगली उठाते हैं।” भाजपा ने मांग की कि पूर्व विधायक अपने बदलते बयानों और संदिग्ध आर्थिक स्रोतों पर जनता के सामने स्पष्ट जवाब दें, ताकि इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।