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बड़ी खबरः पानी के टैरिफ और गारबेज कलेक्शन में हुई बढ़ोतरी

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चंडीगढ़ः 1 अप्रैल यानी आज से वित्त वर्ष बदलने के साथ ही चंडीगढ़ में पानी और गारबेज कलेक्शन चार्ज बढ़ गया है। पानी के साथ ही गारबेज कलेक्शन चार्ज भी अब पांच प्रतिशत बढ़ गया है। पानी के टैरिफ की हर स्लैब में पांच फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। इन दोनों का चार्ज बिल में पांच-पांच प्रतिशत बढ़कर आएगा। अभी 0-15 किलोलीटर पानी पर 3.15 रुपये खर्च आता है जो बढ़कर 3.30 रुपये प्रति किलोलीटर हो गया है। 60 केएल से अधिक पर 22.05 रुपये प्रति केएल खर्च बिल में जुड़ेगा। हालांकि पांच प्रतिशत की वृद्धि बहुत बड़ी नहीं है। कम पानी खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को मामूली अतिरिक्त खर्च वहन करना होगा। जैसे पहली 0-15 किलोलीटर की स्लैब में 15 पैसे की बढ़ोतरी से तीन से पांच रुपये ही अधिक चुकाने होंगे।

मेयर कुलदीप कुमार ने सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट को पानी के रेट नहीं बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था। हालांकि महंगाई को देखते हुए वाटर टैरिफ लागू करते समय ही सालाना पांच प्रतिशत की वृद्धि का नियम बनाया गया है। इस वजह से रेट बढ़ गए हैं। वार्षिक बढ़ोतरी नियम के कारण पहली अप्रैल से गारबेज कलेक्शन चार्ज भी सभी केटेगरी में पांच प्रतिशत तक बढ़ गया है। दो मरला तक के घरों का गारबेज कलेक्शन चार्ज 52.5 रुपये से बढ़कर 55.12 रुपये हो गया है। दो मरला से 10 मरला तक के घरों का चार्ज 105 रुपये से बढ़कर 110.25 रुपये बिल में जुड़ेगा। 10 मरला से एक कनाल तक के घरों को अब 210 की जगह 220.5 रुपये अदा करने होंगे। इसी तरह से एक कनाल से दो कनाल तक के घरों का खर्च अब 262.5 की जगह 275.6 रुपये हो गया है। इसी तरह से दो कनाल से अधिक एरिया के घरों को 367.5 रुपये की जगह पहली अप्रैल से 385.8 रुपये गारबेज कलेक्शन चार्ज हो गया है।

राहत की बात यह है कि अप्रैल में पानी की तरह बिजली के रेट नहीं बढ़ेंगे। इसका कारण यह है कि इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को टैरिफ रिवाइज्ड के लिए ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) के सामने पहले पिटिशन दाखिल करनी होती है। फिर इस पिटिशन पर जेईआरसी के चेयरपर्सन जन सुनवाई के लिए चंडीगढ़ आते हैं। लोगों के सुझाव और शिकायतें दर्ज करने के बाद जेईआरसी ही बिजली का टैरिफ बढ़ाने या नहीं बढ़ाने पर निर्णय देता है। इस बार कोड ऑफ कंडक्ट लगने की वजह से विभाग पिटिशन ही फाइल नहीं कर पाया। अब तो चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही नए टैरिफ पर बात होगी। तब तक पुराना टैरिफ ही नए वित्त वर्ष में लागू रहेगा।

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