नई दिल्ली: देशभर में दवाओं के दाम बढ़ने जा रहे हैं. सरकार ने दवाइयों की कीमतों में करीब 0.65% तक बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है। 2025 के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर दवाओं की कीमतों में इजाफा करने की अनुमति दी गई है। यह आदेश नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) की ओर से जारी किया गया है। इसके मुताबिक, दवा कंपनियां अब तय फॉर्मूले के अनुसार MRP बढ़ा सकती हैं।
इसके लिए उन्हें सरकार से अलग से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी इसे समझें तो अब कुछ जरूरी दवाइयां थोड़ी महंगी हो सकती हैं, क्योंकि कंपनियों को सालाना महंगाई के हिसाब से कीमत बढ़ाने की छूट मिल गई है। संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने पहले ही बयान जारी कर बताया था कि अगर युद्ध आगे भी जारी रहता है तो दिल्ली के व्यापार और उद्योग जगत में 5000 करोड़ रुपए का व्यापार प्रभावित हो सकता है। भागीरथ पैलेस के मेडीकल सर्जिकल सामान के होल सेंसर मुकेश भसीन बताते हैं कि प्लास्टिक का दाना महंगा होने से पैकेजिंग के दाम बढ़े हैं साथ मेडिकल के उपकरण पर भी इसका असर पड़ा है।
बहुत सारे जरूरी कच्चे माल, केमिकल कंपोनेंट्स, प्लास्टिक और एलुमिनियम की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर दवा कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है। क्योंकि टैबलेट और सिरप के निर्माण के साथ-साथ उनकी पैकेजिंग में भी प्लास्टिक और एलुमिनियम का बड़ा उपयोग होता है। पिछले कुछ दिनों में आम इस्तेमाल की दवाओं में शामिल पेरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत भी करीब 47% तक बढ़ गई है।
दर्द निवारक डाइक्लोफेनेक में 54%, डाइक्लोफेनेक पोटेशियम में 33%, अमोक्सिसिलिन ट्राईहाइड्रेट में 45% और सिप्रोफ्लाक्सासिन की कीमत में करीब 60% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दवा और इलाज के रोजाना उपयोग की सिरिंज और थर्मामीटर जैसे मेडिकल उपकरण की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी हुई है। जाहिर सी बात है कि दवाओं के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर इसका बहुत असर पड़ेगा।
