नई दिल्लीः रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी इस समय अलग-अलग लोन फ्रॉड मामलों में ईडी और सीबीआई की कार्रवाई का सामना कर रहे है। लेकिन उनकी मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल, बैंक ऑफ बड़ौदा ने उन्हें फ्रॉड घोषित कर दिया है। इससे पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) भी अनिल को फ्रॉड घोषित कर चुके हैं। रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) ने बताया कि कंपनी को इसे लेकर 2 सितंबर को बैंक की ओर से लेटर मिला है। बैंक ने कंपनी को 1,600 करोड़ रुपए और 862.50 करोड़ रुपए की लाइन ऑफ क्रेडिट दी थी। बताया जा रहा है कि एक नियामक फाइलिंग के अनुसार उनपर इस कार्रवाई के लिए एक दशक से पहले दिए गए ऋणों के कथित दुरुपयोग का हवाला दिया गया है।
आरकॉम ने कहा कि उसे बैंक ऑफ बड़ौदा से 2 सितंबर को एक पत्र मिला है जिसमें कंपनी और उसके प्रवर्तक अनिल अंबानी के ऋण खाते को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने के निर्णय की जानकारी दी गई है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने कंपनी को 1,600 करोड़ रुपये और 862.50 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा स्वीकृत की थी। आरकॉम की ओर से नियामकीय फाइलिंग में जारी बैंकों के पत्र के अनुसार, कुल 2,462.50 करोड़ रुपये में से 28 अगस्त तक 1,656.07 करोड़ रुपये बकाया थे। पत्र में कहा गया है, “इस खाते को 5 जून 2017 से गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।”
आरकॉम नियंत्रण और अपनी देनदारियों को चुकाने के लिए कॉर्पोरेट दिवाला समाधान कार्यवाही से गुजर रही है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा ने पत्र में कहा है कि वर्तमान में एनसीएलटी की ओर से अनुमोदित कोई सक्रिय समाधान योजना अस्तित्व में नहीं है। बैंक ने बताया है कि धोखाधड़ी की घोषणा फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के निष्कर्षों व टिप्पणियों पर आधारित है। उनके अनुसार ऐसा करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तहत है। अंबानी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा की कार्रवाई 12 साल से भी अधिक पुराने मामलों में की गई है। प्रवक्ता ने बताया कि अनिल अंबानी 2006 में आरकॉम की स्थापना से लेकर 2019 में बोर्ड से इस्तीफा देने तक (यानी छह साल पहले तक) बोर्ड में एक गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत थे। बयान में कहा गया है कि अंबानी ने सभी आरोपों और अभियोगों से स्पष्ट रूप से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि वे कानूनी सलाह के अनुसार उपलब्ध उपायों पर आगे बढ़ेंगे।