दो सौ से ज्यादा अभिभावकों का रणबीर राणा को मिला साथ,सर्व सम्मति से हुआ चुनाव
ऊना/सुशील पंडित: उपमंडल बंगाणा के अटल बिहारी वाजपेयी डिग्री कॉलेज बंगाणा में अभिभावक शिक्षक संघ (पीटीए) का चुनाव इस बार बेहद रोचक लेकिन सौहार्दपूर्ण रहा। लंबे समय से चर्चाओं में रहा यह चुनाव सोमवार को सर्वसम्मति के साथ संपन्न हुआ। रणबीर राणा ने अपने अनुभव, संवाद कौशल और रणनीतिक चतुराई, जिसे कई अभिभावकों ने “चाणक्य नीति” बताया, के दम पर पीटीए अध्यक्ष की कुर्सी अपने नाम कर ली।
खास बात यह रही कि चुनाव में विपक्ष से प्रत्याशी ने मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही हथियार डाल दिए और अंततः सर्वसम्मति से रणबीर राणा को अध्यक्ष चुना गया। कॉलेज प्रबंधन की देखरेख में हुए इस चुनाव में अभिभावकों ने बड़ी संख्या में भागीदारी दर्ज करवाई। करीब दो सौ से अधिक अभिभावकों ने पीटीए अध्यक्ष पद के लिए रणबीर राणा को समर्थन दिया। प्रारंभिक दौर में विपक्ष से प्रत्याशी मैदान में उतरा जरूर था, मगर राणा के समर्थन में बढ़ते कदमों और एकजुट होते अभिभावकों को देखकर उसने भी हार मान ली और अंततः चुनाव सर्वसम्मति से संपन्न हुआ।
पारदर्शिता और विकास का वादा कर गए नव नियुक्त अध्यक्ष रणबीर राणा बंगाणा कॉलेज के नव-नियुक्त पीटीए अध्यक्ष रणबीर राणा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह की राजनीति करना नहीं, बल्कि कॉलेज और छात्रों के हित को सर्वोपरि रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीटीए के कार्यों में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और हर निर्णय अभिभावकों की भागीदारी से लिया जाएगा। राणा ने कहा कि कॉलेज की छोटी-बड़ी समस्याओं से लेकर छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों तक, हर मुद्दे का समाधान करना उनका पहला लक्ष्य रहेगा।
रणबीर राणा ने बताया कि वे कॉलेज में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता देंगे। छात्रों की पढ़ाई में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। लाइब्रेरी की सुविधाओं को मजबूत करना, कक्षाओं की कमी को दूर करना और अध्यापक व स्टाफ की समस्याओं को हल करवाने जैसे मुद्दे उनकी प्राथमिकता में रहेंगे। उन्होंने कहा कि कॉलेज के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। रणबीर राणा की सर्वसम्मति से हुई जीत ने न केवल अभिभावकों का विश्वास जीता है बल्कि कॉलेज के भविष्य के लिए भी नई उम्मीदें जगा दी हैं।
