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बददी में आर्य समाज ने मनाई महऋर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती 

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माजिक कुरितियों को दूर कर व वेदों को पुर्नजीवित करने में रही अहम भूमिका-संगीता आर्य

महाराणा प्रताप नगर में उमड़े शहर के हर कोने से लोग

सचिन बैंसलबददी:महऋर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती बददी के महाराणा प्रताप नगर में धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन आर्य समाज की बददी इकाई द्वारा किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर आचार्य अशोक डागर ने शिरकत की वहीं भजन गायिका संगीता आर्य ने भजनों की कमान संभाली। सर्वप्रथम आर्य समाज के प्रतिनिधियों ने वैदिक यज्ञ के साथ कार्यक्रम का आगाज किया जिसमें  अखिल मोहन अग्रवाल ,सूरजभान बंसल, रानेश कुमार राणा व कमलेश बंसल ने यजमान की भूमिका निभाकर यज्ञ संपन्न करवाया। यज्ञ  में वेद मंत्र सहारनपुर से आई भजनोपदेशक संगीता आर्य ने व्याख्यान किया। उन्होने स्वामी दयानंद सरस्वती के जीवन और उनके चरित्र पर प्रकाश डाला और कहा कि उन्होने अंध विश्वासों को दूर करके सामाजिक उत्थान किया वहीं लोगों की जीने की सच्ची राह दिखाई। उन्होने कहा कि वेदों को पुर्नजीवित करने में स्वामी जी का अहम योगदान रहा है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे अमित सिंगला सोशल वैल्फेयर सोसाईटी के अध्यक्ष सुमित सिंगला ने कहा कि हम सबको दयानंद सरस्वती के पदचिन्हों पर चलकर अपना जीवन सफल बनाना चाहिए। मुख्य वक्ता आचार्य अशोक डागर ने कहा कि आज जो भी समाज सुधारक का दावा करते है वो बडी बडी गाडियों में घूमते हैं और बंगलों में रहते हैं लेकिन उस समय के समाज सुधारक पैदल चलकर भूखे प्यासे रहकर, सुविधाओं की चाहत न रखते हुए गांव गांव जाकर सामाजिक कुरितियों को दूर रखने के प्रति अलख जगाते थे। संघर्ष करते थे और अपने व्यक्तित्व से उदाहरण प्रस्तुत करते थे। जब हमारा जीवन साधारण होगा तभी हम असाधारण काम कर पाएंगे।

मानव के कल्याण पर दिया बल-कुलवीरआर्य समाज के बददी के अध्यक्ष कुलवीर सिंह आर्य ने कहा कि दयानंद सरस्वती ने मानव मात्र के कल्याण के लिए सार्वभौमिक धर्म की धारणा पर बल दिया है, जिसे उन्होंने ‘सर्वतंत्र सिद्धांत’ अथवा ‘सनातन नित्य धर्म’ कहा है। उनकी मान्यता के अनुसार धर्म वह है जो तीनों कालों में एक जैसा मानने योग्य हो। धर्म वह है जिसे सत्यमानी, सत्यवादी, सत्यकारी, परोपकारी विद्वान मानते हों, वही सबको स्वीकार हो। दयानंद ने जीवन के प्रति मनुष्य के मर्यादित और संतुलित दृष्टिकोण को ही धर्म की संज्ञा दी है।  इस देश के अंधेरों में ज्ञान की मशाल जलाने वाले आधुनिक भारत के मनीषियों में स्वामी दयानंद सरस्वती भी हैं। इनकी वेदों में दृढ़ निष्ठा थी, जिसके प्रचार-प्रसार के लिए इन्होंने मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की। जिसका भारतीय समाज पर बड़ा असर पड़ा, देश को कई सामाजिक बुराइयों से मुक्त होने में बड़ी मदद की। ऐसे मनीषी की जयंती पर देश उनको नमन कर रहा है।

यह रहे उपस्थित-
इस अवसर आर्य समाज के दीप आर्य, संगीता आर्य, अशोक डागर, हर्ष आर्य, रोहित आर्य, मनीष आर्य, नरेश भारद्वाज, अंकित परमान, नरेश गोयल, डा. आरपी सिंह, बलविंद्र सिंह ठाकुर, राजपूत सभा के सचिव शेषपाल राणा, कमलेश बंसल, नितिन पाटिल, अनिल मलिक, रोड सेफटी प्रधान सुरेंद्र अत्री, चिंतन कुमार चौधरी, योग संगठन मंत्री डा. किशोर ठाकुर, शिव कुमार सिंह, सुबोध कुमार, सरोज आर्य, आभा,  डा .श्रीकांत शर्मा सूरजपूरी, कुसुम बंसल, डा प्रवीर गोयल, कपिल भाटी, सुनील राजपूत, रमन कौशल, राकेश यादव, सुनील शर्मा, सुरेश शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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