चंडीगढ़ः संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी में अमृतधारी सिख व्यक्ति के साथ निंदनीय घटना होने का मामला सामने आया है। जहां व्यक्ति ने आरोप लगाए है कि उसके साथ अबू धाबी में कथित धार्मिक अपमान और अमानवीय व्यवहार किया गया है। हरियाणा के कैथल के रहने वाले दलविंदर सिंह का आरोप है कि अबू धाबी पुलिस ने किरपान पहनने के कारण हिरासत में ले लिया। इस दौरान उन्हें लगभग 20 दिन तक जेल में रखा गया। आरोप है कि पुलिस द्वारा उनसे पगड़ी, किरपान, कड़ा और कंघा जबरन हटवाए गए।
वहीं इस मामले को लेकर दलविंदर सिंह के बेटे मनप्रीत सिंह ने भारत सरकार से मामले में दखल देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की मांग की है। बेटे का कहना है कि पिता दलविंदर सिंह 21 अप्रैल को एक पर्यटक समूह के साथ अबू धाबी पहुंचे थे। यात्रा के दौरान वह बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण मंदिर देखने गए, जहां अबू धाबी पुलिस ने उनके किरपान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। आरोप है कि टूर गाइड और मंदिर प्रशासन द्वारा बार-बार धार्मिक महत्व समझाने के बावजूद पुलिस ने उन्हें जाने नहीं दिया। इसके बाद उन्हें हिरासत में भेज दिया गया।
मनप्रीत सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि उनके पिता को पहले बनियास जेल, फिर अल रबा, और अंत में अल वथबा सेंट्रल जेल में रखा गया। उनका कहना है कि इस मामले को लेकर सीआईडी और जेल प्रशासन ने पहले उनकी गिरफ्तारी को नकारा, जिससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई। जिसके बाद पिता की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई, लेकिन पुलिस ने आरोप लगाया कि दलविंदर ने ‘बहस’ की थी। वहीं बेटे का कहना है कि पिता ना अंग्रेज़ी जानते हैं, ना अरबी जानते है, ऐसे में वह बहसबाजी कैसे कर सकते हैं।
मनप्रीत के मुताबिक, हिरासत के दौरान उनके पिता से पगड़ी, किरपान, कड़ा और कंघा छीन लिए गए और उन्हें मांसाहारी भोजन परोसा गया, जबकि वे पूरी तरह शाकाहारी हैं। अंतिम दिनों में उन्हें बिना पगड़ी के ही भारत डिपोर्ट कर दिया गया, जो कि उनके लिए अत्यंत अपमानजनक और मानसिक रूप से पीड़ादायक अनुभव रहा। मनप्रीत सिंह ने भारत सरकार से मांग की है कि वह यूएई सरकार से इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराए और सुनिश्चित करे कि धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।