चंडीगढ़ः मशहूर पंजाबी सिंगर मनकीरत औलख को पंजाब में बाढ़ पीड़ितों की मदद करने के लिए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने पंजाब में आई बाढ़ पर गहरी चिंता जताई और मनकीरत औलख के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि औलख ने न केवल अपने गीत-संगीत से देश-विदेश में पहचान बनाई है, बल्कि मुश्किल घड़ी में इंसानियत की मिसाल भी पेश की है। अखिलेश यादव ने कहा कि मनकीरत औलख का नाम आज सिर्फ गानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसानियत और सेवा से भी जुड़ गया है। उन्होंने बताया कि औलख ने पंजाब में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए अब तक 5 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है। उनका कहना था कि ऐसे कलाकार समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो अपनी लोकप्रियता को केवल नाम और शोहरत के लिए नहीं, बल्कि समाज की भलाई के लिए इस्तेमाल करते हैं। अखिलेश यादव ने इस मौके पर सिख समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अलग पहचान बनाई है।
साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बाढ़ जैसे गंभीर संकट में राहत पहुंचाने में सरकार विफल रही है। प्रभावित इलाकों में न तो लोगों के लिए पर्याप्त राहत सामग्री पहुंची और न ही पशुओं के चारे की व्यवस्था हो सकी। अखिलेश यादव ने कहा कि पंजाब में आई बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए, कई पशु और मनुष्य इसकी चपेट में आ गए। उन्होंने केंद्र की डबल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार किसान, नौजवान और महिला विरोधी है और संकट की घड़ी में उसने लोगों को अकेला छोड़ दिया।
उन्होंने मांग की कि सरकार को बाढ़ प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देना चाहिए और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही बाढ़ का पानी उतरने के बाद होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए अभी से कदम उठाने की जरूरत है। पंजाब हर साल मानसून के दौरान बाढ़ जैसी आपदा का सामना करता है। इस बार की बाढ़ ने कई जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। हजारों परिवार बेघर हुए, फसलें नष्ट हो गईं और पशुधन का भी भारी नुकसान हुआ। ऐसे समय में समाज के अलग-अलग वर्गों से मदद सामने आई, जिसमें सिंगर मनकीरत औलख की भूमिका बेहद अहम रही। वहीं, राजनीतिक दल इस आपदा को लेकर केंद्र सरकार की जिम्मेदारियों और नाकामियों पर सवाल उठा रहे हैं।
