अमृतसरः शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के प्रेसिडेंट सिमरनजीत सिंह मान और दल खालसा के नेताओं ने एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार और इंटेलिजेंस एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश के मामले में अमरीका में गिरफ्तार निखिल गुप्ता तो बस एक मोहरा है, जबकि इसके असली मास्टरमाइंड भारत में ऊंचे राजनीतिक और प्रशासनिक पदों पर बैठे लोग हैं। मान ने कहा कि भारत में ‘सीक्रेट सर्विस फंड’ का कोई ऑडिट नहीं होता और यह CAG के तहत नहीं आता। इन फंडों का इस्तेमाल विदेशों में सिख नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन का उदाहरण दिया और कहा कि वहां CIA जैसी एजेंसियां हैं जो पार्लियामेंट के प्रति जवाबदेह हैं, लेकिन भारत में ऐसी कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं है।
उन्होंने स्पीकर ओम बिरला पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्हें पार्लियामेंट में यह मुद्दा उठाने की इजाजत नहीं दी गई। कॉन्फ्रेंस के दौरान अवतार सिंह खांडा की मौत पर सवाल उठाते हुए मान ने कहा कि उन्हें ‘पोलोनियम’ जैसा खतरनाक जहर दिया गया होगा, जिसे अक्सर रूसी इंटेलिजेंस से जोड़ा जाता है। उन्होंने हरदीप सिंह निज्जर, सुखदुल सिंह और पाकिस्तान में सिख नेताओं की हत्याओं के लिए सीधे तौर पर ‘RAW’ और दिल्ली लीडरशिप को जिम्मेदार ठहराया।
दल खालसा के लीडर कंवरपाल सिंह बिट्टू ने चेतावनी दी कि भारत सरकार अब पंजाब में एक नया ‘किलिंग पैटर्न’ लागू कर रही है। गैंगस्टर्स (जैसे लॉरेंस बिश्नोई) के जरिए सिख एक्टिविस्ट्स की हत्या करके इसे ‘गैंगवार’ का रूप दिया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि अगर भविष्य में किसी खालिस्तानी लीडर को गोली मारी जाती है, तो इसे ‘सरकारी गोली’ माना जाएगा, न कि गैंगस्टर्स के बीच का अंदरूनी झगड़ा।
पंथक संगठनों ने ऐलान किया कि खालिस्तानी सोच और पंथिक एकता के प्रचार-प्रसार के लिए 21 फरवरी और 29 अप्रैल को मोगा में बड़े पैमाने पर प्रोग्राम किए जाएंगे। उन्होंने SGPC के चुनाव तुरंत कराने की भी मांग की। कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी सिखों से अपील की गई कि वे यह पक्का करें कि भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट के लिए सिखों की शहादत की कुर्बानी न दी जाए।