नई दिल्लीः ईरान-इजरायल युद्ध को लेकर भारत में महंगाई बढ़नी शुरू हो गई है। दरअसल, युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। जिसके कारण भारत में महंगाई की मार लोगों पर पड़ने लगी। यही कारण है कि भारत में फ्लाइट सफर पर युद्ध का असर दिखने लगा है। ईरान युद्ध की वजह से भारत में एयरलाइंस कंपनियां किराए में बढ़ोतरी कर रही है। इंडिगो के बाद अब एयर इंडिया ने यात्री किराए में बढ़ोतरी कर दी है। एयर इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस ने मंगलवार को घोषणा की कि वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मार्गों पर फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) में वृद्धि कर रहे हैं।
एटीएफ की बढ़ती कीमत की वजह से टाटा के स्वामित्व वाली एयरलाइंस एयर इंडिया ने फ्लाइट किराया बढ़ा दिया है। 8 अप्रैल से डोमेस्टिक और 10 अप्रैल से इंटरनेशनल दोनों रूट पर किराए में बढ़ोतरी कर दी गई है। जेट फ्यूल की बढ़ती कीमत की वजह से किराया बढ़ाने का फैसला लिया गया है। कंपनी का कहना है कि ईरान युद्ध की वजह से जेट फ्यूट का किराया दोगुना हो चुका है। बढ़ती लागत की वजह से किराए में फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया है। युद्ध की वजह से एटीएफ की कीमत, जो 99.40 डॉलर प्रति बैरल थी, 27 मार्च को 195.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। घरेलू मार्गों के लिए एयर इंडिया ने एक बड़ा बदलाव करते हुए ‘फ्लैट सरचार्ज’ की जगह ‘दूरी-आधारित संरचना’ को अपनाया है।
अब यात्रियों को उड़ान की दूरी के हिसाब से अतिरिक्त शुल्क देना होगा। सरकार द्वारा घरेलू एटीएफ की कीमतों में वृद्धि की सीमा 25 प्रतिशत तय किए जाने के बाद एयरलाइन ने यह नपा-तुला कदम उठाया है। एयर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि जिन यात्रियों ने इन नई तारीखों से पहले अपनी टिकट बुक कर ली है, उन पर इस वृद्धि का असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, यदि कोई यात्री अपनी यात्रा की तारीख बदलता है या टिकट को री-इश्यू कराता है, तो उसे नए सरचार्ज के अनुसार भुगतान करना होगा। कंपनी का कहना है कि वर्तमान में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च हो रहा है। इंडिगो के बाद एयर इंडिया का यह कदम भारतीय विमानन क्षेत्र में बढ़ते वित्तीय दबाव को दर्शाता है।