नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाने के मुद्दे पर उनके बयान का तीखा जवाब देते हुए इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी अनुशासन से जुड़ा मामला बताया है। पार्टी ने कहा कि यह कोई असाधारण कार्रवाई नहीं बल्कि एक सामान्य संगठनात्मक निर्णय है, जो समय-समय पर लिया जाता है।
हालांकि, इसके साथ ही AAP ने राघव चड्ढा की संसदीय भूमिका और उनके व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल भी उठाए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि चड्ढा लंबे समय से पार्टी लाइन के खिलाफ जा रहे थे और कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए थे।
पार्टी व्हिप उल्लंघन और अनुशासन पर सवाल
AAP नेताओं के अनुसार, राघव चड्ढा ने कई बार पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना, एलपीजी संकट जैसे मुद्दों पर संसद में बोलने से बचना और विपक्षी दलों के वॉकआउट में हिस्सा न लेना, इन आरोपों के प्रमुख उदाहरण बताए गए।
पार्टी का कहना है कि संसद में एकजुट होकर फैसले लेना विपक्ष की रणनीति का हिस्सा होता है, लेकिन जब कोई सदस्य इन सामूहिक निर्णयों का पालन नहीं करता, तो यह सीधे तौर पर पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना जाता है।
भाजपा और केंद्र सरकार पर चुप्पी को लेकर सवाल
AAP ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने लंबे समय से संसद में ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया, जिसमें उन्होंने भाजपा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सवाल किए हों।
सीनियर नेता संजय सिंह ने कहा कि AAP की राजनीति हमेशा से निडरता और संघर्ष पर आधारित रही है।
उन्होंने कहा,
“हमने अरविंद केजरीवाल से सीखा है कि जनता के मुद्दों पर डटकर लड़ना चाहिए। लेकिन जब देश के इतने बड़े मुद्दे सामने हैं, तब चुप रहना समझ से परे है।”
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग, लोकतंत्र, पंजाब के अधिकार और पार्टी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई जैसे कई मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी चिंता का विषय है।
भुगवंत मान ने कहा – यह सामान्य पार्टी फैसला
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस मामले को पूरी तरह पार्टी का आंतरिक निर्णय बताया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल समय-समय पर अपने नेताओं और उपनेताओं में बदलाव करते रहते हैं। उन्होंने अपने उदाहरण का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी में जिम्मेदारियां बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई सदस्य पार्टी के सामूहिक निर्णयों या व्हिप के खिलाफ जाता है, तो कार्रवाई करना जरूरी हो जाता है।
सौरभ भारद्वाज का हमला: बड़े मुद्दों से दूरी क्यों?
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में समय सीमित होता है और उसमें बड़े राष्ट्रीय मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि चड्ढा ने कई अहम मौकों पर अपनी भूमिका नहीं निभाई और विपक्षी रणनीति का हिस्सा बनने से बचते रहे।
उन्होंने कहा कि देश में चुनाव प्रक्रिया, वोट कटने और सरकारी संस्थाओं के दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दे उठ रहे हैं, लेकिन इन पर चुप रहना उचित नहीं है।
आतिशी का सवाल: क्या भाजपा से डर रहे हैं?
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भी राघव चड्ढा से सीधे सवाल किए।
उन्होंने कहा कि आज देश कई बड़े संकटों से गुजर रहा है—एलपीजी सिलेंडर की कीमत, चुनावी पारदर्शिता और लोकतंत्र पर खतरा—लेकिन इन मुद्दों पर संसद में आवाज उठाना जरूरी है।
उन्होंने पूछा,
“क्या राघव चड्ढा भाजपा या प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछने से डर रहे हैं?”
आतिशी ने यह भी कहा कि जब पार्टी के नेता सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, तब चड्ढा की अनुपस्थिति भी कई सवाल खड़े करती है।
पार्टी का रुख: निडर राजनीति ही पहचान
AAP ने दोहराया कि पार्टी की पहचान निडर, पारदर्शी और जनहित आधारित राजनीति है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में जनता के मुद्दों पर आवाज उठाना हर प्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। अगर कोई नेता ऐसा नहीं करता, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
जनता के मुद्दों पर सक्रिय रहने की जरूरत
पार्टी ने कहा कि संसद में सीमित समय का उपयोग देश के असली मुद्दों के लिए किया जाना चाहिए—जैसे महंगाई, बेरोजगारी, लोकतंत्र, चुनाव प्रक्रिया और राज्यों के अधिकार।
उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब नेताओं से जवाब चाहती है और यह समय है जब हर जनप्रतिनिधि को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी होगी।
AAP ने अंत में स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है और जो भी नेता इससे हटकर काम करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पार्टी ने राघव चड्ढा से अपील की कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट करें और यह बताएं कि वह देश और जनता के मुद्दों पर कहां खड़े हैं।