चंडीगढ़, 12 फरवरी 2026: प्रस्तावित इंडिया–यूएसए ट्रेड डील को लेकर पंजाब में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारत बंद के समर्थन में राज्य के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन किए और इस समझौते को भारतीय किसानों और व्यापारियों के लिए घातक करार दिया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्लेकार्ड उठाकर अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों की ड्यूटी-फ्री एंट्री का विरोध किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि इस समझौते से स्थानीय किसानों और डेयरी कारोबार पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

भारतीय कृषि पर संभावित असर
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इंडिया–यूएसए व्यापार समझौता लागू होने की स्थिति में अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में कम या शून्य शुल्क पर उपलब्ध हो सकते हैं। इससे घरेलू उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों और टैरिफ संरचनाओं से संबंधित जानकारी World Trade Organization (WTO) द्वारा प्रकाशित की जाती है, जहां सदस्य देशों की व्यापारिक प्रतिबद्धताओं और नियमों का विवरण उपलब्ध है।
टैरिफ असमानता पर बहस
विरोध के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि यदि अमेरिकी उत्पाद भारत में कम शुल्क पर आते हैं, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिका में शुल्क का सामना करना पड़ सकता है, जिससे असमान व्यापारिक ढांचा बन सकता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका की व्यापार नीतियां और टैरिफ संरचना Office of the United States Trade Representative (USTR) द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
आर्थिक प्रभाव पर बढ़ती चर्चा
नेताओं ने कहा कि यह समझौता भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, विशेषकर छोटे किसानों और डेयरी संचालकों के लिए।
भारत के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और आयात-निर्यात नीतियों की निगरानी Ministry of Commerce and Industry द्वारा की जाती है, जहां आधिकारिक व्यापार नीतियां और अद्यतन उपलब्ध हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज
भारत बंद के दौरान पंजाब में विरोध प्रदर्शन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया–यूएसए ट्रेड डील का किसानों पर प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए कौन-सी नीतियां अपनाती है।
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में इस समझौते को लेकर और स्पष्ट नीतिगत बयान सामने आ सकते हैं।
