किशनगंजः बंद कमरे में स्टूडेंट द्वारा फंदा लगाकर आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। मृतक सुरजीत कुमार रॉय (18) घर में ही लोगों के साथ बैठा बात कर रहा था, इस दौरान अचानक बिजली चली गई, जिसके बाद वो कमरे में चला गया। मंगलवार रात 7:30 बजे चीखने की आवाज पर परिजनों ने खिड़की से झांकर देखा तो वह छत के कुंडे से फंदे के सहारे लटका दिखा।
घटना की जानकारी मिलने पर परिजनों ने उसे नीचे उतारा और आनन फानन मे छत्तरगाछ रेफरल अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टर और एम्बुलेंस उपस्थित नहीं होने से परिजनों में आक्रोश दिखा। छात्र की स्थिति गंभीर होने पर परिजनों ने प्राइवेट गाड़ी द्वारा लड़के को किशनगंज सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जानकारी देते मृतक युवक के भाई ने बताया कि उन्होंने ग्रामीणों की मदद से सुरजीत को छतरगाछ रेफरल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन अस्पताल में कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे और कोई एम्बुलेंस भी नहीं था परिजनों ने प्राइवेट गाड़ी द्वारा मरीज को छतरगाछ से 30 किलोमीटर दूर किशनगंज ले गए जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इधर बेटे की स्थिति देख पिता अचेत होकर गिर पड़ा, जिसको ग्रामीणों के सहयोग से छतरगाछ अस्पताल लाया गया, परन्तु डॉक्टर गायब रहने के कारण उन्हें भी किशनगंज सदर अस्पताल इलाज हेतु भेजा गया है। डॉक्टर के मृत घोषित करने के बाद परिजनों और स्थानीय युवकों ने अस्पताल डॉक्टर और स्टाफ पर इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया और गायब डॉक्टर और कर्मी पर कार्रवाई की मांग की है।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। छतरगाछ कैंप प्रभारी राम बहादुर शर्मा और पहाड़कट्टा थाना अध्यक्ष फुलेंद्र कुमार ने बताया कि परिजनों ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में कोई प्रार्थना पत्र मिलता है, तो आगे की जांच और कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद परिवार और मोहल्ले में शोक का माहौल है। छत्तरगाछ अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामाजिक स्तर पर भी चिंता का विषय है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जिला पदाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।