दनकौर कोतवालीः ग्रेटर नोएडा दनकौर कोतवाली क्षेत्र के दलेलगढ़ गांव में दुखद खबर सामने आई है, जहां 6 साल से खुला बड़ा मौत का गड्ढा परिवार पर काल बन गया। दरअसल, गहरे गड्ढे में भरे पानी में डूबने से 3 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद से ही परिवार में कोहराम मचा हुआ है। घटना के बाद से प्रशासन के खिलाफ परिजनों में आक्रोश व्याप्त है। इस घटना ने एक बार फिर प्राधिकरण और प्रशासन की लापरवाही का रवैया फिर सामने ला दिया है। दलेलगढ़ गांव निवासी अनिल की बेटी अंजलि अपने मायके आई थी। अंजलि की बुलंदशहर के सिकंदराबाद में ससुराल है। अंजजि के साथ उसका तीन साल का बेटा देवांश और बेटी को भी लेकर दलेलगढ़ आई थी। अनिल के घर के पास ही एक मंदिर है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में भंडारे का आयोजन किया गया। अंजलि अपने बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मंदिर गई थी। परिवार के लोग मंदिर में चल रही पूजा अर्चना और भंडारे में व्यस्त हो गए। उसी दौरान नजर बचाकर देवांश अपनी बहन के साथ खेलता-खेलता मंदिर के पास सरकारी जमीन पर बने गहरे गड्ढे में भरे पानी के पास चला गया। जब बच्चा किसी को दिखाई नहीं दिया तो उसकी खोजबीन शुरू की गई। मंदिर में काफी देर तक उसे खोजा गया। सुराग नही मिला तो कुछ लोग गड्ढ़े के पास चले गए।
जहां वह दिखाई दिया तो ग्रामीणों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। आनन-फानन में बच्चे को पानी से निकाला गया और उपचार के लिए एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद से ही परिवार में कोहराम मच गया है। ग्रामीणों ने बताया कि गड्ढे में पानी भरा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि 6 वर्ष पहले इस जमीन पर गड्ढा हुआ था। तभी से शिकायत का सिलसिला जारी है। यहां करीब 15 से 20 फीट गहरा गड्ढा है। यहां से मिट्टी निकाली गई है। वर्षा का पानी अब भरा हुआ है। यदि इस जगह पर मिट्टी का भराव कर दिया जाता या फिर चारदीवारी कर दी जाती, तो आज बच्चा अपने परिवार के साथ होता।
बता दें कि नोएडा के सेक्टर 150 में बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरकर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी। पिछले सप्ताह ग्रेटर नोएडा में एक नाले में कार गिरने और दिल्ली के जनकपुरी में सड़क पर खोदे गए गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण व प्रशासन के अधिकारियों की संवेदना तक नहीं जागी। नोएडा में हुई घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सख्त रुख अपनाते हुए मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित की थी। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ तक को पद से हटा दिया था।