जालंधर, (ENS): इंटरनेशनल बॉडी बिल्डर वरिंदर घुम्मन का कुछ माह पहले फॉर्टिस अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था। इस मामले को लेकर SIT गठित की गई थी। वहीं गठित SIT की रिपोर्ट आ गई है। परिवार ने दावा किया कि रिपोर्ट में मौत का कारण डॉक्टरों की लापरवाही बताया गया है। पिता ने वरिंदर घुम्मन की मौत को लेकर आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि बेटे ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। आशंका है कि इसी को लेकर डॉक्टरों द्वारा कोई हेरा फेरी की गई है या क्या लापरवाही की है, जिसके कारण डॉक्टरों ने बेटे की ऑपरेशन के दौरान केयर नहीं की। पिता ने कहा कि इस मामले में वह कोर्ट का रुख करेंगे।
पिता ने कहा कि बेटे की मौत को लेकर उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए। डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द किया जाए और उन्हें सलाखों के पीछे डाला जाए। पिता ने कहा कि वह नामी अस्पताल में बेटे का उपचार करवाने के लिए गए थे। इंटरनेशनल खिलाड़ी को डॉक्टरों ने मौत के घाट उतार दिया।
दूसरी और वीरेंद्र घुम्मन के भाई रब्बी ने कहा कि परिवार इंसाफ की लड़ाई लगातार लड़ रहा हैं। उन्होंने का मेडिकल रिपोर्ट आ गई है। मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण भाई का निधन हुआ है। परिवार ने डीजीपी गौरव यादव और पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर से अपील की है कि वह जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई करते हुए डॉक्टरों के खिलाफ पर्चा दर्ज करें। परिवार की अपील है कि लापरवाही के कारण नामी अस्पताल को बंद किया जाना चाहिए। वही डॉक्टर के लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए और उन्हें सलाखों के पीछे डालना चाहिए। भाई ने कहा कि जांच में तीन माह लग गए, लेकिन साथ मैंबरी कमेटी ने बरकी से मामले की जांच की और सच सामने लाकर रख दिया।
भाई का कहना है कि वरिंदर की ईसीजी रिपोर्ट सही नहीं आई थी। ईसीजी रिपोर्ट के अनुसार भाई का ऑपरेशन नहीं किया जाना चाहिए था, लेकिन फिर भी डॉक्टरों द्वारा वरिंदर का ऑपरेशन किया गया। इस तरह की कई अन्य रिपोर्ट और वीडियो के आधार पर मामले की 7 मैंबरी कमेटी ने जांच की। रबड़ी ने कहा कि वरिंदर का एक डेढ़ घंटे तक चलने वाला ऑपरेशन को डॉक्टर द्वारा अगर 5 से 5:30 घंटे लगे हैं तो जाहिर सी बात है कि अगर ऑपरेशन ज्यादा लंबा चलता है तो एनेस्थीसिया की डोज भी डॉक्टर द्वारा मरीज को कुछ ज्यादा दी जाएगी। परिवार ने कहा है कि वरिंदर का शरीर नीला पढ़ने को लेकर की भी जांच की जाएगी।