जालंधर (Ens): कम उम्र में जहां बच्चे खेलने-कूदने पर ध्यान देते हैं वहीं अब इस बीच जालंधर के 66 फीट रोड मेें रहने वाली एक छोटी सी बच्ची लोगों के लिए मिसाल बनी हुई है। रोजाना ई-रिक्शा खुद चलाकर स्कूल में जाने वाली बच्ची आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
खास बात यह है कि बच्ची न सिर्फ अपने सपनों की राह खुद तय करती है बल्कि अपनी दो छोटी बहनों के साथ भी लेकर जाती है। सुबह की जाती हुई हवा में जब बाकी बच्चे किसी सहारे स्कूल में जाते हैं तब यह बहादुर बच्ची आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर देती है।
यह बच्ची सिर्फ अकेले ही नहीं अपनी छोटी बहनों को भी साथ लेकर पहुंचती हैं। सुबह की ताजी हवा में जब बाकी बच्चे किसी के सहारे स्कूल जाते हैं तब यह बहादुर बच्ची आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करती है। पढ़ाई के प्रति लगन, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और मेहनत से आगे बढ़ने का जज्बा मिशाल पेश करता है।
स्थानीय लोगों का यह कहना है कि यह बच्ची यह साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी राह मुश्किल नहीं होती। उसकी मेहनत, साहस और आत्मविश्वास आज हर बेटी के लिए संदेश हैं। इससे यह सीख मिलती है कि खुद पर भरोसा रखकर आप आगे बढ़ सकते हैं और दूसरों का सहारा भी बन सकते हैं।
यह कहानी सिर्फ एक बच्ची की नहीं बल्कि उसकी सोच की है जो बेटियों को बोझ नहीं बल्कि समाज की ताकत मानती हैं। ऐसी बेटियां ही देश का भविष्य संवारती हैं।