नई दिल्ली: अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से खरबों डॉलर की कमाई के प्लान पर अब पानी फेर दिया है। शुक्रवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि बीते साल अप्रैल में राष्ट्रपति के द्वारा शुरु किए गए टैरिफ वॉर को गैरकानूनी बताते हुए इसको अवैध घोषित कर देना चाहिए। कोर्ट ने यह साफ कहा है कि IEEPA राष्ट्रपति को राष्ट्रीय इमरजेंसी की घोषणा के अंतर्गत व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का पूर्ण अधिकार नहीं देता है। इसके जरिए उन्होंने दुनिया के सारे देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था।
आखिर क्या होता है IEEPA?
इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर एक्ट यानी की IEEPA दरअसल 1977 में लाया गया एक संघीय कानून है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने के बाद कुछ ग्लोबल आर्थिक लेनदेन को विनियमित करने का अधिकार देता है। यह एक्ट उन मामलों में कार्रवाई की अनुमति देगा जिनको कानून अमेरिका के लिए असामान्य और असाधारण खतरे के रुप में दर्शाता है और जो देश के बाहर से पैदा हो रहा है। इस कानून को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी क्वार्ट्र द्वारा कानून के रुप में पेश किया गया था।
इस वजह से पड़ी कानून की जरुरत
IEEPA को साल 1917 के ट्रेडिंग विद-ए-एनिमी एक्ट के कुछ हिस्सों को बदलने के लिए डिजाइन किया गया था। व्यापक आपातकालीन शक्तियां मुहैया करवाई। अमेरिका में 1972-1974 के बीच हुए एक प्रमुख राजनीतिक घोटाले वाटरगेट कांड के समय में कांग्रेस के राष्ट्रपति के आपातकालीन अधिकार के लिए साफ सीमाएं तय करने का प्रयास किया गया था।
राष्ट्रपति IEEPA का इस समय करते है इस्तेमाल
आईईईपीए का इस्तेमाल अमेरिकी राष्ट्रपति के द्वारा जिन मामलों में किया जाता है। उसके अनुसार, राष्ट्रपति आपातकाल की स्थिति किसी असामान्य खतरे की पहचान और यह साबित होने पर की इस खतरे का स्त्रोत विदेशी है या फिर खतरा राष्ट्रीय सुरक्षा विदेश नीति या इकोनॉमी से जुड़ा हो सकता है। ऐसे मामलों में राष्ट्रपति उस खतरे से जुड़े खास आर्थिक लेन-देन की विनियमित या बैन कर सकते हैं।
ट्रंप को इस वजह से मिली हार
यूएस सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप टैरिफ के शुक्रवार को आया फैसला इस बात को उजागर करता है। भले ही राष्ट्रपति आईईपीए के अंतर्गत आर्थिक साधनों का इस्तेमाल करके विदेशी खतरों का तेजी से जवाब दे सकते हैं परंतु व्यापार और टैक्सेशन पर प्राथमिक अधिकार कांग्रेस के पास ही रहता है। आईईईपीए एक शक्तिशाली प्रतिबंध कानून है लेकिन कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इसका इस्तेमाल व्यापक टैरिफ नीति के लिए एक खुली छूट के रुप में नहीं किया जा सकता है। ये एक इमरजेंसी बैन एक्ट है न कि सामान्य व्यापार कानून।