चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 20 फरवरी से शुरू होने जा रहा हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र प्रदेश के विकास की दिशा, जनकल्याण की प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं को सशक्त आधार प्रदान करेगा। प्रदेश की बीजेपी सरकार ने कार्यभार संभालते समय जो संकल्प पत्र प्रदेश की जनता के समक्ष रखा था, वह हमारे लिए गीता के समान है। वह सुशासन, पारदर्शिता तथा जनहित के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता का स्पष्ट दस्तावेज है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मंगलवार को हरियाणा निवास चंडीगढ़ में पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, सूचना एवं जनसंपर्क भाषा विभाग के महानिदेशक के.मकरंद पांडुरंग व मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय मौजूद थे।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि पूरा देश जानता है कि भाजपा सरकारों में कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं है। प्रदेश की बीजेपी सरकार ने भी अपने संकल्पों को जमीन पर उतारने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि 19 सितम्बर, 2024 को जारी किए गए संकल्प पत्र के 217 वादों में से 60 वादे पूरे किए जा चुके हैं और 120 वादों पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 मार्च, 2025 को उन्होंने विधानसभा में बतौर वित्त मंत्री अपना पहला बजट प्रस्तुत किया था। उस बजट वर्ष में 248 घोषणाएं की गई थी। इनमें से 77 बजट घोषणाएं पूरी कर ली गई हैं और 165 बजट घोषणाओं का कार्य अंतिम चरण में है, जिन्हें जल्दी ही पूरा कर लिया जाएगा।
2 हजार से ज्यादा मिले अब तक सुझाव
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए बजट बनाने की प्रक्रिया जारी है। पूर्व-बजट परामर्श की परंपरा को निभाते हुए, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के साथ अब तक कुल 13 बैठकें की हैं। इनमें उन्हें 2 हजार 199 सुझाव प्राप्त हुए। इस बार प्रदेश सरकार ने ए.आई. चैटबॉट का नया प्रयोग किया। इसके माध्यम से भी लगभग 12 हजार 400 सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सभी पर मंथन जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार कम से कम 4-5 हजार सुझावों को आगामी बजट वर्ष 2026-27 में सम्मिलित करेंगे।
जन भावनाओं के अनुरूप होगा आगामी बजट
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका हरियाणा की जनता से वादा है कि आगामी बजट वर्ष 2026-27 न केवल जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं को भली-भांति पूरा करेगा, बल्कि उनके परिवारों, गांवों, शहरों, जिलों और समूचे हरियाणा के विकसित भविष्य की सुदृढ़ नींव रखेगा।

उन्होंने हरियाणा की अर्थव्यवस्था और राजकोष की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि 29 जनवरी, 2026 को योजना विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य का सकल घरेलू उत्पाद अर्थात् जी.डी.पी. वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमानित आंकड़ों के अनुसार 13 लाख 67 हजार 769 करोड़ रूपये रही है। जबकि गत वर्ष के इन्हीं आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में यह 12 लाख 13 हजार 951 करोड़ रूपये थी। ये आंकड़ें दर्शाते हैं कि वर्ष 2025-26 में वर्ष 2024-25 के मुकाबले राज्य की जी.डी.पी. 12.67 प्रतिश्त की दर से बढ़ी है। 29 जनवरी, 2026 को योजना विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में राज्य की प्रतिव्यक्ति आय 3 लाख 58 हजार 171 रूपये रही है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिव्यक्ति आय 2 लाख 19 हजार 575 रूपये है। हरियाणा की प्रतिव्यक्ति आय देश के शीर्ष 5 राज्यों में शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षो में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ी है। वर्ष 2014-15 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 47 हजार 382 रूपये थी। इन आंकड़ों से यह पूर्णतः स्पष्ट होता है कि पिछले 10 वर्षों में राज्य की प्रति व्यक्ति आय में लगभग ढाई गुणा की वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार के सभी विभागों का वास्तविक खर्चा 1 लाख 75 हजार 801 करोड़ रुपए था, जबकि वर्ष 2014-15 में यह केवल 61 हजार 904 करोड़ रुपए था। चालू वित्त वर्ष में 16 फरवरी, 2026 तक सभी विभागों का वास्तविक खर्चा 1 लाख 59 हजार 747 करोड़ रूपये है। मार्च माह तक यह आंकड़ा लगभग 2 लाख करोड़ रूपये हो जाएगा, जो कि बजट का लगभग 98 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष बार-बार टिप्पणियां करता है कि सरकार अर्थव्यवस्था पर खर्च नहीं कर रही है, लेकिन वे उन्हें बताना चाहेंगे कि प्रदेश सरकार के समय में अर्थव्यवस्था पर हुआ वास्तविक खर्च उनके समय में हुए वास्तविक खर्च से लगभग तीन गुणा है। लगभग 11 विभागों जिनमें पुलिस, परिवहन, राजस्व, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान शामिल हैं, का वर्ष 2025-26 के लिए कुल व्यय 80 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है। लगभग 21 विभागों का अब तक का व्यय वर्ष 2025-26 के लिए 70 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है तथा लगभग 18 विभागों का कुल व्यय वर्ष 2025-26 के लिए 60 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है।
जिनके समय में अर्थव्यवस्था लचर—पचर थी वो सुझाव दें रहे
मुख्यमंत्री ने इस बीच विपक्ष पर निशाना भी साधा, उन्होंने कहा कि जिनके समय में अर्थव्यवस्था लचर पचर थी, आज वो बाहर बैठ कर सुझाव दें रहे है कि प्रदेश सरकार का अच्छा आर्थिक प्रबंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार अपने राजकोष का कितना अच्छा प्रबंधन कर रही है, यह जानने के लिए राजकोषीय घाटा सबसे उत्तम तरीका है। वर्ष 2024-25 में राज्य का राजकोषीय घाटा तत्कालीन जी.डी.पी. का 2.83 प्रतिशत रहा, जबकि 2014-15 में यह 2.88 प्रतिशत था। ध्यान रहे कि एफ.आर.बी.एम. एक्ट के अनुसार उस समय भी राजकोषीय घाटे की ऊपरी सीमा 3 प्रतिशत थी और आज भी 3 प्रतिशत है। यह तथ्य है कि राजकोषीय घाटा उस समय हमसे अधिक था। हमारे कुशल वित्तीय प्रबंधन का यह पहला परिचायक है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि 16 वें वित्त आयोग (2026-2031) की सिफारिशों के अनुसार हरियाणा का केंद्रीय करों में हिस्सा 1.093 प्रतिशत से बढ़कर 1.361 प्रतिशत हुआ है, जो 15वें वित्त आयोग की तुलना में 24.52 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाता है।
13वें वित्त आयोग की रिपोर्ट से राज्यों को केंद्रीय करों में मिलने वाले हिस्से में हरियाणा 20वें स्थान पर, 14वें वित्त आयोग में 17वें स्थान पर, 15वें वित्त आयोग में 21वें स्थान पर था। परंतु अब 16वें वित्त आयोग में हरियाणा पहले स्थान पर आ गया है।