अमृतसरः शिरोमणि अकाली दल पूर्व अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने आज कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाए। मीडिया से बातचीत में ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि गुरुद्वारा अंब साहिब मोहाली की जमीन बेचने के संबंध में मैनेजर द्वारा निजी खाते में पैसे जमा करवाने का मामला साफ तौर पर करपट और घोटाले की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि जमीन बेचने के अधिकार सिर्फ़ कार्यकारी समिति के पास होते हैं, किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होते।
328 पावन स्वरूपों के मामले पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सच दबाने के लिए सिख पंथ को बोलने से रोका गया। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पावन स्वरूपों की छपाई से जुड़े मामले का भी ज़िक्र करते हुए कहा कि घटिया गुणवत्ता का कागज़ और प्रिंटिंग गलतियों के कारण ये स रूप प्रकाश्य योग्य नहीं थे। उन्होंने बताया कि संस्कार से पहले जांच कमेटी बनाने के निर्देश दिए गए थे पर बाद में दबाव बनाने की कोशिश की गई। राजनीतिक दृष्टि से बयान देते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने स्पष्ट किया कि सत्ता पाने के लिए किए गए समझौतों की कोई कद्र नहीं होती।
उन्होंने कहा कि जब तक सरदार सुखबीर सिंह बादल शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष हैं, उनके साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि यदि सुखबीर बादल अध्यक्षता छोड़ते हैं तो बातचीत के लिए रास्ता खुल सकता है। डेरावाद पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब की राजनीति में डेरों का बढ़ता दख़ल सिख पंथ के लिए घातक साबित हो रहा है और यह 1947 के बाद रची गई एक सोची-समझी साजिश का नतीजा है। और ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एलान किया कि यदि भविष्य में SGPC की जिम्मेदारी सौंपी गई तो 1999 से अब तक हुए सभी जमीन घोटालों पर व्हाइट पेपर जारी किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ धार्मिक एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
