ऊना/ सुशील पंडित: ग्राम पंचायत लठियाणी के गांव नलूट में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य पंकज शर्मा ने आत्मदेव ब्राह्मण, उनके पुत्र गोकर्ण और धुंधकारी के मार्मिक प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि संस्कार विहीन संतान परिवार के लिए कष्ट का कारण बनती है, जबकि ज्ञान मार्ग पर चलने वाली संतान कुल का उद्धार करती है।
कुसंगति का परिणाम है विनाश
कथा के दौरान कथा व्यास आचार्य जी ने बताया कि आत्मदेव नामक ब्राह्मण के यहाँ दो पुत्र हुए। धुंधकारी, जो कुसंगति के कारण व्यसनों में डूब गया और अपने माता-पिता के लिए दुख का कारण बना। वहीं, ज्ञान के प्रतीक गोकर्ण ने सदैव धर्म का मार्ग चुना। महाराज जी ने भावुक स्वर में कहा, “संतान को केवल संपत्ति देना पर्याप्त नहीं है, उन्हें संस्कार देना उससे कहीं अधिक आवश्यक है।”
प्रेत योनि से मुक्ति और गोकर्ण की महिमा
दूसरे दिन की कथा का मुख्य आकर्षण धुंधकारी का प्रेत योनि से उद्धार रहा। महाराज जी ने समझाया कि कैसे धुंधकारी ने अपने पापों के कारण प्रेत योनि प्राप्त की, लेकिन गोकर्ण द्वारा सुनाई गई भागवत कथा के प्रताप से सात दिनों के भीतर उसे मोक्ष प्राप्त हुआ।
”भागवत कथा केवल कान से सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का दर्शन है। धुंधकारी का उद्धार इस बात का प्रमाण है कि भगवान की शरण में आने पर घोर पापी का भी कल्याण संभव है।” – कथा व्यास आचार्य पंकज शर्मा द्वारा सुना गए प्रसंग में भक्ति और संकीर्तन में डूबे श्रद्धालु कथा के बीच-बीच में भजनों पर झूमते नजर आए। पंडाल ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गुंजायमान रहा। आज की आरती में कांता देवी, अनिता कुमारी, बेबी,सोनू,राजेश कुमार, मिंटू ब संजू,सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय लोग उपस्थित रहे।
