पटियालाः महाराजा हीरा सिंह की छठी पीढ़ी के वंशज कुंवर अभी उदय प्रताप सिंह का पारंपरिक दस्तारबंदी समारोह सोमवार को नाभा के हीरा महल में श्रद्धा और सम्मान के साथ आयोजित किया गया। यह ऐतिहासिक और पारिवारिक समारोह सिख परंपराओं और शाही रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया। इसमें राज्य भर की कई वीआईपी और प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। दस्तारबंदी समारोह सिख परंपरानुसार अरदास (प्रार्थना) के साथ शुरू हुआ। इसके बाद कुंवर अभ उदय प्रताप सिंह को औपचारिक रूप से दस्तार भेंट किया गया।
सिख परंपरा में दस्तारबंदी न केवल एक धार्मिक संस्कार है बल्कि जिम्मेदारी, कदरों-मूल्यों और पारिवारिक व सामाजिक विरासत की निरंतरता का प्रतीक भी है। शिरोमणइ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस मौके पर विशेष मेहमान के रूप में भाग लिया। उन्होंने कुंवर अभी उदय प्रताप सिंह को पगड़ी भेंट की। उन्होंने रानी प्रीति सिंह सहित शाही परिवार के सदस्यों से भी मुलाकात की। एडवोकेट धामी ने दस्तारबंदी की परंपरा को सिख इतिहास और मूल्यों से जोड़ते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।
इसके अलावा, ब्यास डेरे के मुखी बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो ने भी दस्तारबंदी समारोह की शोभा बढ़ाई। समारोह में पहुंचने से पहले, बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो अखाड़े में अपने भक्तों से मिले और उन्हें आशीर्वाद दिया। फिर उन्होंने महल में पहुंचे परिवार को आशीर्वाद दिया। बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो की मौजूदगी ने समारोह की आध्यात्मिक पवित्रता को और भी बढ़ा दिया। परिवार ने बताया कि दस्ताारबंदी समारोह बहुत ही सादगी, अनुशासन और श्रद्धा के साथ किया गया। सिख परंपराओं और शाही मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा गया। परिवार ने कहा कि यह समारोह सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपने सभ्याचार, इतिहास और जिम्मेदारियों से जोड़ने का साधन है।
