नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत की डिप्लोमेटिक सक्रियता एक बार फिर वैश्विक मंच पर उजागर हो गई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर यह साफ किया है कि यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की भारत यात्रा भारत-EU संबंधों की मजबूती होती नींव का प्रतीक है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि- ‘भारत के लिए गर्व की बात है कि गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोप के सीनियर नेता जैसे कि यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेन शामिल हुए। यह उपस्थिति सिर्फ औपचारिक नहीं थी बल्कि यह भारत और यूरोप के बीच साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक आदर्शों तथा साथ की कमिटमेंट को दर्शाती है’।
India is privileged to host European Council President António Costa and European Commission President Ursula von der Leyen during our Republic Day celebrations.
Their presence underscores the growing strength of the India-European Union partnership and our commitment to shared… pic.twitter.com/tdKuI6oKyp
— Narendra Modi (@narendramodi) January 26, 2026
भारत और यूरोपीय संघ के रिश्ते हुए मजबूत
पिछले कुछ सालों में भारत और यूरोपीय संघ के संबंध रणनीतिक साझेदारों में बदल चुके हैं। व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल इनोवेशन और वैश्विक सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। पीएम मोदी के अनुसार, यूरोपीय यूनियन के नेताओं की इस यात्रा से इन क्षेत्रों में संवाद और सहयोग और भी मजबूत होगा।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यूरोपीय नेतृत्व की गणतंत्र दिवस समारोह में उपस्थिति भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करती है। यह दर्शाती है कि भारत न सिर्फ एशिया में बल्कि विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक जरुरी साझेदार के तौर पर उभर रहा है। भारत और यूरोपीय यूनियन दोनों ही नियम आधारित अंतराष्ट्रीय व्यवस्था, बहुपक्षीयता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रबल समर्थक हैं।
पीएम मोदी ने यह संकेत दिया है कि भविष्य में भारत-यूरोप के रिश्ते और भी मजबूत होंगे। यह दौरा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर रिश्तों को नई एनर्जी देगा और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में दोनों पक्षों को साथ में लाएगा।
