लुधियानाः शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में इंजेक्शन के रेट को लेकर हंगामे का मामला सामने आया है। मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन अपने ड्रग स्टोर पर 500 रुपए का इंजेक्शन 7500 रुपए में दे रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन से जब रेट कम करने को कहा तो ड्रग स्टोर वाला 5 हजार रुपए में देने को तैयार हुआ जिसके बाद गुस्साए मरीज के परिजनों ने अस्पताल के बाहर पक्का धरना लगा दिया। शिरोमणि अकाली दल यूथ विंग के नेता जसदीप सिंह काउंके परिजनों के साथ शिवराज अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। उधर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आरोप निराधार हैं। अगर परिजनों को रेट को लेकर कोई दिक्कत है तो वो सिविल सर्जन को शिकायत दें। वो अपना जवाब उन्हें दे देंगे।
काउंके ने कहा कि कुछ दिन पहले उनके दोस्त की मां का बीपी कंट्रोल नहीं हुआ तो वो माता जी को लेकर शिवराज अस्पताल में आया था। डॉक्टरों ने माता जी काे चेक किया और एडमिट कर दिया। रात को डॉक्टरों ने 5 इंजेक्शन मंगवाए थे जिसमें से 2 इंजेक्शन रात को लगे।
काउंके ने कहा कि सुबह जब स्टाफ बदला तो उन्होंने 5 इंजेक्शन फिर से मंगवा दिए। जब उनका दोस्त ड्रग स्टोर पर पहुंचा तो उसने पूछा कि ये वही इंजेक्शन हैं जो रात को गए थे। ड्रग स्टोर में बैठे कर्मचारी ने कहा कि वही हैं जिस पर उसने 2 इंजेक्शन लिए और वार्ड में चले गया। उसने स्टाफ को कहा कि 3 इंजेक्शन रात के बचे हैं और दो ये हैं। स्टाफ ने पहले 3 इंजेक्शन बचे होने से इनकार कर दिया। थोड़ी देर बाद कहीं किनारे रखे वो 3 इंजेक्शन मिल गए। उसके बाद स्टाफ ने ट्रीटमेंट शुरू कर दिया। स्टाफ ने कुछ देर बाद उनके दोस्त को एक पर्ची पकड़ा दी और कहा कि ड्रग स्टोर से दवाइयां लेकर आओ। जब वह दवाई लेने आया तो पता चला कि उन दवाइयों की कीमत 24 हजार रुपए है। उसके पास इतने पैसे नहीं थे तो उसने मुझे फोन किया कि कहीं सस्ते में दिला दो।
जसदीप सिंह ने बताया कि वो अस्पताल पहुंचा और उसने दवाई के बारे में पूछा, जिसके बाद उसका रेट ऑनलाइन चेक किया। उसने बताया कि इंजेक्शन पर 7500 रुपए रेट प्रिंट था जबकि ऑनलाइन वही इंजेक्शन 500 रुपए का था। उसके बाद उन्होंने दवाई की दुकानों पर रेट पता किया तो वहां पर भी उसकी कीमत 500 रुपए ही थी।
उन्होंने कहा कि जब रेट में इतना ज्यादा फर्क था तो उन्होंने ड्रग स्टोर पर आकर एक अन्य व्यक्ति की मदद से स्टिंग किया। ड्रग स्टोर वाले को कहा कि बाहर इसकी कीमत 500 रुपए है जिस पर उसने कहा कि वो 10 प्रतिशत लेस दे सकते हैं। बार्गेनिंग करने पर वह 5 हजार रुपए में इंजेक्शन देने को तैयार हो गया जिस व्यक्ति ने उनके साथ स्टिंग किया था उसने वीडियो उन्हें नहीं दिया और न ही वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड किया। उसके बाद उनके परिवार में किसी की मौत हो गई तो वो अस्पताल में नहीं आ पाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर धरना लगाया है। उन्होंने साफ कर दिया कि तब तक धरना नहीं हटाएंगे जब तक अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई नहीं होती। इस संबंध में सिविल सर्जन व पुलिस को भी शिकायत देंगे।
देर रात पूर्व विधायक रणजीत सिंह ढिल्लों धरने में पहुंचे और उन्होंने धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं को कहा कि वो इस संबंध में उनके साथ हैं। इस संबंध में सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे। ढिल्लों ने कहा कि दवाइयों के नाम पर मजबूर लोगों से लूट नहीं होनी चाहिए।
शिवराम अस्पताल के मैनेजर अखिलेश ने बताया कि उन पर लगे सारे आरोप गलत हैं। जसदीप सिंह अपना पक्ष सिविल सर्जन के आगे रखें और वह सिविल सर्जन मैडम को ही समझा सकते हैं कि उन्होंने कैसे ट्रीटमैंट किया है और वह किस तरह से पेमेेंट ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि मरीज के परिजनों को चाहिए कि धरना लगाने के बजाए वह सिविल सर्जन से बात करें और अपना पक्ष रखकर मामले की जांच करें।