नई दिल्ली: भारत आर्थिक विकास के मोर्च पर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। अब दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करवा दी है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया है। 2047 तक पीएम नरेंद्र मोदी ने विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय किया है। अब इसी बीच अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की आर्थिक मजबूती को खुलकर स्वीकार कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी अब भारत की वैश्विक विकास को एक अहम स्तंभ बताया है। जनवरी में जारी होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक से पहले आईएमएणप की प्रवक्ता ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अहम बात की है।
भारत का भरोसा हुआ मजबूत
आईएमएफ ने मजबूत घरेलू उपभोग के आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आईएमएफ की प्रवक्ता ने कहा कि भारत की तीसरी तिमाही के नतीजे भी उम्मीद से कहीं अच्छे हैं। ऐसे में जनवरी में आने वाले WEO अपडेट में भारत की ग्रोथ अनुमान संशोधित हो सकता है। इससे यह साफ हो गया है कि भारत की विकास दर को लेकर आईएमएफ का भरोसा और मजबूत हो गया है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर पूर्वानुमान में बड़ा संशोधन किया है। वित्त वर्ष 2026 के लिए ग्रोथ अनुमान भी 4.4% से बढ़ाकर 6.6% और 2027 के लिए 6.7% की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। यूएन के मुताबिक, निजी उपभोग में तेजी और सार्वजनिक निवेश में भारी बढ़ोतरी के कारण यह सुधार किया गया है। इसके अलावा अमेरिका में हाई टैरिफ का भारतीय निर्यात पर असर भी सीमित रहने का आकलन किया गया है।
वर्ल्ड बैंक ने बढ़ाया जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
विश्व बैंक ने घरेलू मांग और कर सुधारों के दम पर चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। जून से यह 0.9 प्रतिशत ज्यादा हो जाएगा। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संभावनाएं में यह कहा गया है कि 2026-27 में ग्रोथ 65% तक धीमी हो जाएगी। यह अनुमान इस आधार पर लगाया है कि अमेरिका पर 50% आयात शुल्क लागू ही रहेगा। इसके बाद रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि दर बनाकर रखेगा।
भारत पर नहीं पड़ा टैरिफ का असर
विश्व बैंक के अनुसार, अमेरिका में होने वाले कुछ निर्यातों पर हाई टैरिफ होने के बाद भी भारत की वृद्धि दर पर बड़ा असर नहीं हुआ है। इसका कारण है मजबूत घरेलू मांग, निर्यात में विविधता और निजी उपभोग में सुधार, भारत के कुल वस्तु निर्यात में अमेरिकी की हिस्सेदारी करीबन 12% है। रिपोर्ट में यह आगे बोला गया है कि वित्त वर्ष 207-28 में ग्रोथ 6.6% तक पहुंच जाएगी।