नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका के संभावित हमले के बीच पाकिस्तान घबरा गया है। अमेरिकी हमले के बढ़ते खतरे के बीच पाकिस्तान को डर है कि यदि ईरान में सत्ता बदली तो विद्रोह की आग उसके यहां भी लग सकती है। पाकिस्तान का अशांत बलूचिस्तान प्रांत ईरान के सिस्तान-ब्लूचिस्तान से लगा हुआ है। जहां पर आजादी की मांग दशकों से उठ रही है। ईरान में अमेरिकी हमले से हालात और बिगड़े तो पाकिस्तान के इस प्रांत में विद्रोहियों के और ज्यादा एक्टिव होने की आशंका है। पाकिस्तान में इस बात की काफी चर्चा है और डिप्लोमैट्स का यह कहना है कि ईरान शासन को गिराना पाकिस्तान के लिए तबाही लाएगा।
पाकिस्तान के उड़े होश
पाकिस्तान की एक रिपोर्ट्स के अनुसार, एक्सपर्ट्स और अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता क्योंकि इसकी कीमत तबाही होगी। लेख में यह लिखा गया है कि ईरान पाकिस्तान के लिए कोई दूर की चिंता नहीं है। दोनों देशों के बीच करीबन 900 किलोमीटर लंबी सीमा है। पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील प्रांत ब्लूचिस्तान से लगती है। ईरान में किसी भी तरह की उथल-पुथल का सीधा असर सीमा पर उग्रवाद, हथियारों की तस्करी, शरणार्थियों की आमद और आर्थिक अस्थिरता के तौर पर सामने आ सकता है।
पाकिस्तान में बढ़ जाएगा शरणार्थी संकट
2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर दोबारा कब्जा कर लिया था। उस समय वहां पर लाखों की संख्या में अफगान शरणार्थी पाकिस्तान आ गए थे। पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहा था। लाखों अफगान शरणार्थियों ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी है। यदि ईरान में सत्ता परिवर्तन होगा या अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करेगा तो पाकिस्तान में एक और बड़ा शरणार्थी संकट पैदा हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले हुए कर्ज के बहाने चल रहा पाकिस्तान एक और बड़ा शरणार्थी आगमन झेलने के लिए भी तैयार नहीं है।
ईरान में सत्ता परिवर्तन बनेगा खतरा
पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का यह कहना है कि ईरान में जबरदस्ती सत्ता परिवर्तन का असर सिर्फ पाकिस्तान तक नहीं होगा। इससे पूरे मध्य पूर्व में दरारें और भी बढ़ जाएगी। प्रॉक्सी युद्ध बढ़ जाएंगे। चीन, रुस और तुर्की क्षेत्रीय शक्तियां भी इसमें शामिल होगी। पाकिस्तान, ऊर्जा व्यापार और प्रवासी कामगारों की कमाई के लिए खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर है। यदि क्षेत्र अस्थिर होगा तो पाकिस्तान की भी दिक्कतें बढ़ेगी। पाकिस्तान की मीडिया में यह कहा जा रहा है कि ईरान में यदि सत्ता का पतन होगा तो यह पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक तबाही के तौर पर साबित होगा।