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बिजली/पानी बिल विवाद: अत्यधिक और औसत बिल पर मुआवजा देने के निर्देश

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चंडीगढ़: हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने यूएचबीवीएन (UHBVN) से जुड़े मामलों में लंबे समय तक औसत आधार पर बिजली बिल जारी करने और बाद में एकमुश्त अत्यधिक राशि के बिल थमाने को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है।

आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि बहादुरगढ़ के एक मामले में आयोग ने पाया कि उपभोक्ता को लंबे समय तक बिल प्राप्त नहीं हुए या माइनस बिल जारी किए गए, जिनका भुगतान संभव नहीं था। इसके पश्चात अचानक लगभग 2.38 लाख रुपये का बिल जारी कर दिया गया। शिकायत के बाद भी सुधार चरणबद्ध और अधूरा किया गया, जिससे संबंधित अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली उजागर होती है। आयोग ने यह भी माना कि विद्युत आपूर्ति संहिता के तहत अनिवार्य पूर्व सूचना और न्यूनतम समय-सीमा का पालन नहीं किया गया।

हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम, 2014 की धारा 17(1)(ह) के तहत दंडात्मक शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग ने गलत संड्री तैयार करने वाले दो सीए अधिकारियों पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाने तथा प्रत्येक द्वारा उपभोक्ता को 1,000 रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, गलत संड्री को स्वीकृति देने वाले एसडीओ अधिकारियों के प्रति असंतोष दर्ज करते हुए उनके नाम आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

आयोग ने यह भी आदेश दिया कि जुलाई 2022 से गलत रूप से जारी किए गए प्रत्येक बिलिंग चक्र के लिए उपभोक्ता को 500 रुपये की दर से अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। यह राशि प्रारंभ में निगम अपने कोष से देगा, जिसे बाद में दोषी एजेंसी या अधिकारियों से वसूला जा सकेगा।

हिसार जिले के एक अन्य मामले में उपभोक्ता के दो बिजली खातों में मार्च 2020 से फरवरी 2024 तक औसत आधार पर बिल जारी किए गए। जहां पहले लगभग 160 यूनिट की द्विमासिक खपत के बिल आते थे, वहीं बाद में एक खाते में लगभग 45,000 यूनिट दर्शाते हुए तीन लाख रुपये से अधिक का बिल और दूसरे खाते में लगभग 20,000 यूनिट की खपत दिखाकर 98 हजार रुपये का बिल जारी कर दिया गया। आयोग ने इसे उपभोक्ता पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डालने वाला और गंभीर मानसिक पीड़ा का कारण बताया।

आयोग ने यह भी पाया कि विद्युत आपूर्ति संहिता, 2014 के प्रावधानों के अनुसार न तो उपभोक्ता को पूर्व सूचना दी गई और न ही भुगतान के लिए न्यूनतम 30 दिनों का समय दिया गया। अत्यधिक बिलिंग के कारणों को भी स्पष्ट नहीं किया गया।

आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि आयोग ने एसजीआरए द्वारा प्रति खाते दिए गए 1,000 रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त मानते हुए, प्रत्येक गलत तरीके से जारी किए गए बिल को अलग मामला मानकर दोनों खातों के लिए प्रति गलत बिल 500 रुपये की दर से मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। यह मुआवजा प्रारंभ में डीएचबीवीएन अपने कोष से देगा, जिसे बाद में दोषी एजेंसी या अधिकारियों से वसूला जा सकेगा।

आयोग ने संबंधित अधिकारियों को दोनों खातों में जारी किए गए गलत बिलों की सटीक संख्या निर्धारित कर शीघ्र मुआवजा जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, दोनों वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों से पुनः आग्रह किया गया है कि वे ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट नीति बनाएं।

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