सन् 1900 में लॉर्ड करज़न ने सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब को की थी भेंट
अमृतसरः सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब एक ऐतिहासिक पल तब देखा गया, जब 125 साल पुरानी कीमती घड़ी को फिर से ठीक कराकर श्रद्धालुओं के लिए चालू किया गया। यह घड़ी वर्ष 1900 में भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड करज़न ने अपनी पहली सवारी दौरे के दौरान सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब को भेंट की थी। यह घड़ी विदेशी प्रसिद्ध इलकिन्टन कंपनी द्वारा बनाई गई थी, जिसे उस समय अत्यंत महंगी और विशिष्ट माना जाता था।
कुछ वर्षों से यह ऐतिहासिक घड़ी खराब होने के कारण बंद पड़ी थी। संगतों की लंबे समय से इच्छा थी कि इस विरासत चिन्ह को फिर उसी रूप में संवारा जाए। इस सेवा की ज़िम्मेदारी बाबा महिंदर सिंह निश्काम सेवक जत्था यूके ने निभाई। उन्होंने घड़ी को यूके ले जाकर उसी मूल कंपनी से पूरी तरह मरम्मत करवाई, ताकि इसकी प्रामाणिकता और ऐतिहासिक महत्त्व बरकरार रहे। निश्काम सेवक जत्था यूके द्वारा सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब में सोने के पत्तियों की सेवा भी लगातार निभाई जा रही है।
इसी कड़ी के तहत घड़ी की सेवा को भी सेवा भाव से पूरा किया गया। बीते दिनों शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई हरजिंदर सिंह धामी द्वारा इस घड़ी को श्री दरबार साहिब में पुनर्स्थापित किया गया। यह घड़ी रागी सिंहों वाली साइड के दरवाज़े के पास, जहां पहले भी लगाई गई थी, वहीं पुनः सुशोभित की गई है। एक बार चाबी देने के बाद यह घड़ी लगभग आठ दिन तक चलती रहती है। श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर भगवंत सिंह ने इस अवसर पर बाबा महिंदर सिंह और उनकी पूरी टीम का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सेवा सच्चखंड की ऐतिहासिक विरासत को संभालने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।
