अमृतसरः जिले में जीवनज्योत परियोजना के तहत जिला बाल सुरक्षा विभाग द्वारा शहर में बच्चों की भीख मांगने के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला बाल सुरक्षा विभाग के अधिकारी तरुणजीत सिंह ने बताया कि बाल सुरक्षा कानून के तहत टीमों द्वारा शहर के विभिन्न चौराहों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में रेड की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि डिप्टी कमिश्नर द्वारा मिली शिकायत के आधार पर रंजीत एवेन्यू क्षेत्र में खास कार्रवाई की गई, जहां बच्चों द्वारा भीख मांगने की सूचनाएं मिल रही थीं। अक्सर ये बच्चे अधिकारियों को देखकर भाग जाते थे, लेकिन आज की योजनाबद्ध कार्रवाई के दौरान कुल 7 बच्चों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया।
अधिकारी तरुणजीत सिंह ने कहा कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया जाएगा। साथ ही दावा किया जाने वाले माता-पिता के आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चे वास्तव में उन्हीं के हैं या नहीं। यदि जरूरत पड़ी तो डीएनए टेस्ट भी कराए जाएंगे और गलत पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को भीख मांगना उनका भविष्य बर्बाद कर देता है। ये बच्चे पढ़ाई की उम्र में हैं, मांगने की नहीं।
सरकार द्वारा उपलब्ध योजनाओं के तहत उन्हें स्कूलों से जोड़ने का काम किया जाएगा और 4000 रुपये स्पॉन्सरशिप समेत अन्य सहायता भी दी जाएंगी। उन्होंने शहर वासियों से अपील की कि सड़कों पर मांगने वाले बच्चों को पैसे न दिए जाएं, बल्कि इस संबंध में प्रशासन को जानकारी दी जाए, ताकि अमृतसर को बाल भीखिया मुक्त बनाया जा सके। समाजसेवी सोनो जंडियाला द्वारा इस संबंध में डीसी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद बाल विकास विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अचानक छापेमारी कर 7 बच्चों को रेस्क्यू कर लिया। कार्रवाई के दौरान बच्चों के माता-पिता भी मौके पर पहुंचे और अपने बच्चों को साथ ले जाने की मांग की।
इस पर प्रशासन ने कहा कि माता-पिता डीसी कार्यालय में पहचान पत्र दिखाकर ही अपने बच्चों को ले जा सकेंगे। समाजसेवी सोनो जंडियाला का कहना है कि पुलिस टीम को देखकर कई बच्चे भागने की कोशिश कर रहे थे, जिससे स्पष्ट होता है कि उन्हें कार्रवाई की पूरी जानकारी थी। उन्होंने मांग की कि रेस्क्यू किए गए बच्चों की पूरी जांच की जाए और डीएनए टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाए कि बच्चे अमृतसर के हैं या किसी अन्य प्रदेश से लाए गए हैं।