जालंधर, ENS: भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम ने 10 दिसंबर को चेन्नई के मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम में इतिहास रच दिया। दरअसल, भारतीय खिलाड़ियों ने जूनियर वर्ल्ड कप 2025 में अर्जेंटीना को 4-2 से हराकर अपना पहला कांस्य पदक जीता और देश का नाम रोशन किया। टीम ने 9 साल बाद यह पदक हासिल किया है। वहीं कांस्य पदक जीतने के बाद जालंधर लौट गुरजोत सिंह का पीएपी चौक पर गांव वासियों और माता-पिता द्वारा स्वागत किया गया।
मामले की जानकारी देते हुए हॉकी खिलाड़ी गुरजोत ने बताया कि जूनियर वर्ल्ड कप 2025 में 24 टीमों के साथ मैच खेले गए, जिसमें भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता। गुरजोत ने बताया कि 9 साल बाद यह मेडल भारतीय टीम ने हासिल किया। विदेशों की टीमों के साथ मुकाबला करके तीसरे नंबर पर आना हमारे लिए गर्व की बात है। फाइनल मैच को लेकर गुरजोत ने बताया कि अर्जेटिना के साथ मुकाबला था, लेकिन आखिर के 10 मिनट में मैच का रूख बदला और अर्जेटिना ने 4 गोल कर दिए। भारत में खेले जा रहे टूर्नामेंट में काफी कुछ उन्हें सीखने को मिला। गुरजोत का कहना है कि क्रिकेट के साथ हॉकी को भी प्रमोट किया जाना चाहिए।
वहीं गुरजोत की माता ने कहा कि जूनियर वर्ल्ड कप 2025 में भारतीय टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया। माता ने कहा कि उन्हें गुरजोत पर मान है और आज जालंधर लौटने पर गर्व महसूस हो रहा है। वहीं गांव में गुरजोत के लौटने पर गांव वासियों द्वारा प्रोग्राम रखा गया है। वहीं दूसरी ओर नेशनल हॉकी हरमन सिंह ने बताया कि उन्हें खुशी है कि उनके हुसैनवाला गांव का युवा खिलाड़ी ने जालंधर का नाम रोशन किया। इस दौरान गुरजोत की कड़ी मेहनत को लेकर बताया कि गांव में खेलने के लिए मैदान नहीं है, ऐसे में वह दूसरे गांव में जाकर मेहनत करता रहा। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उनके गांव में एक खेल का मैदान बनाया जाए। गुरजोत सुबह साईकिल पर दूसरे गांव में बने मैदान में प्रैक्टि्स करने के लिए जाता था।