Sat, Jan 03, 2025, 20:57:41 PM
- Advertisement -
HomeSpiritualसपने में भगवान का दिखना कैसा संकेत है? Premanand Maharaj से जानें...

सपने में भगवान का दिखना कैसा संकेत है? Premanand Maharaj से जानें जवाब

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

धर्म: सोते समय सभी को सपने आना एक आम बात है। ज्यादातर सभी के साथ यह होता है लेकिन कई बार कुछ ऐसे सपने भी आते हैं जिनके बारे में जानने के लिए उत्सुकता आ जाती है। इसी तरह के कुछ सपने होते हैं जिसमें भगवान के दर्शन हो या भगवान की छवि जैसा कुछ सपने में दिख रहा हो परंतु सपने में भगवान के आने का क्या मतलब है और ऐसा क्यों होता है इस पर वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने जवाब दिया है।

तीन तरह के होते हैं सपने

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि सपने तीन तरह के होते हैं एक सात्विक जिसमें भगवान या महान पुरुष दिखे, दूसरे राजसिक जिसमें आप सुख भोगते हुए दिखें, तीसरा तामसिक जिसमें आप लड़ाई झगड़ा करते दिखे और एक सपने ऐसे होते हैं जिनका कोई मतलब ही नहीं होता है। यह सपने व्यर्थ के होते हैं। महाराज के अनुसार, इन तीनों गुणों में से आए हुए सपनों में यदि कोई महात्मा आता है या फिर कोई भगवान नजर आए तो उसको भगवान की कृपा समझना चाहिए।

सपने का मतलब सोचना व्यर्थ

महाराज ने आगे कहा कि आप उसे कृपा समझें लेकिन उसका चिंतन करना या फिर सपने का मतलब क्या होता है या सोचना कि भगवान आपसे क्या कहना चाहते हैं यह व्यर्थ है। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, इस तरह के सपनों का कोई भी अर्थ नहीं होता है। वो कहते हैं कि आप लोग समझ लें कि यह सिर्फ एक सपना है जिसका कोई भी अर्थ नहीं होता है।

कलयुग में सिर्फ नाम जप सत्य है

आगे महाराज ने सभी को नाम जप करने की सलाह दी। उनका कहना है कि इस कलयुग में सिर्फ और सिर्फ नाम जप ही सत्य है। उनके अनुसार, संत, महात्मा या भगवान यदि आपके सपने में आए और उन्होंने आपको दर्शन दिए तो यह आपके सात्विक कर्मों का फल है। इसका कोई पॉजिटिव या फिर नेगेटिव अर्थ नहीं है।

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest News

- Advertisement -
- Advertisement -

You cannot copy content of this page