जालंधर, ENS: फगवाड़ा गेट की इलेक्ट्रिक मार्केट के व्यापारी के साथ पार्किंग विवाद को मारपीट हुई। हालांकि इस घटना को 8 साल बीत गए है, लेकिन व्यापारी द्वारा अभी तक इंसाफ की गुहार लगाई जा रही है। व्यापारी ने बताया कि इस मामले में थाना 3 के उस समय के एसएचओ द्वारा की गई धक्केशाही के मामले में एसएचओ भी सस्पेंड हो गया था। लेकिन इस विवाद को लेकर व्यापारी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मामले की जानकारी देते हुए अंकुश गुप्ता ने बताया कि आज वहा सीपी दफ्तर पहुंचे और उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
दरअसल, अंकुश गुप्ता ने बताया कि 2018 में अश्विनी गेरा नामक व्यक्ति ने उसकी दुकान के आगे गाड़ी पार्क कर दी थी। इस पर उन्होंने गाड़ी आगे-पीछे खड़ी करने के लिए कहा, तो बहस हो गई। अंकुश का आरोप है कि अपने रसूख का डर दिखाकर आरोपी ने उस पर हमला किया और दुकान के अंदर ही उसकी उंगली तोड़ दी। इसकी एमएलआर कटवाकर केस दर्ज करवाया गया। तब से अब तक 8 साल बीत चुके हैं, मेरा साथ दुश्मनी निकाली जा रही है। कभी किडेनैप करवा दिया जाता है। कभी जान से मारने की धमकी दी जाती है।
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि ये किडनेपिंग पुलिस की तरफ से की गई थी। 2 साल पुराने मामले में तब जालंधर के सीपी स्वपन शर्मा थे। अब सीपी धनप्रीत कौर को भी ह्यूमन राइट कमीशन की तरफ से आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा गया है, लेकिन पुलिस कर्मचारियों को बचाया जा रहा है। वहीं राहुल गुप्ता ने बताया कि हमारे साथ धक्का हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर हम डीजीपी तक मिल चुके हैं, लेकिन कोई इंसाफ नहीं मिल पाया है। इस घटना को लेकर उसे बुरी तरह पीटा गया और पैर तोड़ दिया। जबरदस्ती दुकान से उठाकर हथकड़ी लगाई गई। व्यापारी अंकुश गुप्ता ने जालंधर पुलिस पर लगाए हैं कि ह्यूमन राइट कमीशन के आदेश के बावजूद पुलिस 40 दिन से आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही है।
अंकुश गुप्ता ने आरोप लगाया कि 3 जुलाई 2023 को डिविजन नंबर 3 पुलिस ने मुझे दुकान से उठा लिया। उनका अश्वनी गेरा के साथ कपप्शन का कोर्ट केस चल रहा था। इस केस को वापस लेने के लिए साजिश रची गई। इसके बाद पार्किंग विवाद खड़ा कर दिया। इसमें मेरे भाई को मारा पीटा और कपड़े फाड़ दिए गए। इसके बाद पुलिस कंप्लेंट की गई। वीडियो दिखाए गए, सबूत के तौर पर CCTV फुटेज दी गईं, लेकिन मामले को दबाने की कोशिश की गई।
व्यापारी ने आरोप लगाया कि अश्विनी गेरा के बड़े राजेताओं से संबंध हैं, इसलिए उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं। अंकुश गुप्ता ने जालंधर डिविजन-3 पुलिस पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि मैंने थाने में शिकायत दी थी। बावजूद अश्विनी गेरा पर कार्रवाई करने के पुलिस ने उलटा उसे ही दुकान से जबरदस्ती उठा लिया। इस दौरान ASI मक्खण सिंह और कॉन्सटेबल अमरेंदर सिंह, संतोख सिंह और 2 प्राइवेट लोग मुझे गाड़ी में बिठाकर ले जाते हैं। पुलिस मुलाजिमों पर आरोप है कि वो उसे उठाकर शहर से 7 किलोमीटर दूर रामामंडी थाने में लेकर जाते हैं।
रात को मुझ पर पर्चा दर्ज कर दिया जाता है। व्यापारी ने दावा किया कि यहां पुलिस ने गन पॉइंट पर लेकर कहा कि जिस आदमी पर आपने करप्शन का केस कर रखा है, उसे वापस ले लो। मैंने मना किया तो मुझे बुरी तरह से पीटा गया। इसके फोटो के तौर पर सबूत भी पुलिस को दिए गए हैं। अंकुश गुप्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे हवालात में भेज दिया। इसके बाद वहां पर भी मारपीट की गई। मेरे पैर में चोट आई जिसके फोटो के तौर पर सबूत हैं। पुलिस ने पीट-पीटकर मुझे मरने के लिए छोड़ दिया गया, लेकिन मैं केस वापस लेने के लिए नहीं माना।
अंकुश गुप्ता ने बताया कि पुलिस से इंसाफ न मिलने पर वह ह्यूमन राइट कमीशन में चले गए। अब ह्यूमन राइट कमीशन ने फैसला दिया है कि आरोपी पुलिस कर्मचारियों पर पर्चा दर्ज किया जाए। ह्यूमन राइट कमीशन ने इसकी कॉपी सीपी धनप्रीत कौर को भी भेजी है। आज (शुक्रवार) को वह सीपी जालंधर से मिलने आए थे, लेकिन वो मिली नहीं। ह्यूमन राइट कमीशन ने एसएचओ गगनदीप शेखों और 5 अन्य के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। ह्यूमन राइट कमीशन के आर्डर दिखाते हुए अंकुश गुप्ता ने कहा कि इस आदेश को आए 40 दिन बीत चुके हैं।
लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। हर बार उनको बुलाया जाता है और हमारे सामने इन्क्वायरी अफसर को डांट लगाकर मामले को आगे डाल दिया जाता है। व्यापारियों का आरोप है कि पुलिस केवल आश्वासन देती है, लेकिन करती कुछ नहीं। अपने कर्मचारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। हमने कोर्ट में जाकर SHO को तो सस्पेंड करवा दिया था, लेकिन पुलिस की तरफ से कार्रवाई की पहल नहीं की गई। एक व्यापारी पर हार्ड क्राइम का केस पुलिस हल नहीं कर पा रही है, तो ऐसे में आम आदमी का क्या होगा।