मोगाः जिले की डिप्टी कमिश्नर चारूमिता को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजमार्ग-703 परियोजना से जुड़े 3.7 करोड़ रुपये के भूमि अधिग्रहण घोटाले के आरोपों के बाद की गई है। पंजाब सरकार की ओर से जारी आदेशों के तहत धर्मकोट के उप मंडल मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ज.), मोगा और नगर निगम कमिश्नर मोगा को पंजाब सिविल सेवाएं (सजा एवं अपील) नियम 1970 के नियम 4 (1) (a) के अधीन सरकारी सेवा से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

निलंबित के दौरान अधिकारी को पंजाब सिविल सेवाएं नियमावली, खंड-1, भाग-1 के नियम 7.2 के अंतर्गत दर्ज उपबन्धों के अनुसार भत्ता मिलेंगे। वहीं निलंबित के दौरान इस अधिकारी का मुख्य कार्यालय, चंडीगढ़ रहेगा और वह अपनी मुख्य कार्यलय नहीं छोड़ेंगे, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति न हो। यह कार्रवाई तब हुई जब लोक निर्माण विभाग ने चारूमिता के खिलाफ चार्जशीट जारी की और विजिलेंस ब्यूरो से इस पूरे मामले की जांच करने को कहा है।
बता दें कि विवाद उस भूमि को लेकर है जो 1963 में लोक निर्माण विभाग, फिरोजपुर द्वारा सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी और जो पिछले पांच दशकों से लगातार सार्वजनिक उपयोग में थी। इसके बावजूद, 2022 में इस भूमि को व्यावसायिक उपयोग के लिए स्वीकृति दे दी गई, जबकि यह हिस्सा अब भी एक सक्रिय सड़क का भाग था। 2014 में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत इस सड़क का चौड़ीकरण किया गया और भूमि को दोबारा अधिग्रहित दिखाया गया।
बाद में 2019 में 3.7 करोड़ रुपये का मुआवजा नई अधिग्रहित भूमि के रूप में जारी कर दिया गया, जबकि इसकी मूल रिकॉर्ड 1963 से ही सरकारी उपयोग में थी। गड़बड़ी तब सामने आई जब मुआवजा प्राप्तकर्ता ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की। कोर्ट के नोटिस के जवाब में यह पाया गया कि 1963 के मूल अधिग्रहण रिकॉर्ड गायब हैं, जिससे पूरे अधिग्रहण और स्वीकृति प्रक्रिया पर सवाल उठे।
दूसरी ओर इस मामले को लेकर चारूमिता ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि एसडीएम का सीएलयू जारी करने में कोई रोल नहीं होता। यह जीएलएडीए द्वारा स्वीकृत किया गया था। मुआवजे की राशि भी अभी तक जारी नहीं की गई है। उन्होंने दावा किया कि पुरस्कार को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कभी मंजूरी नहीं दी और एनएचएआई द्वारा जमा की गई राशि अभी भी एसडीएम के खाते में अप्रयुक्त पड़ी है।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि चारूमिता की भूमिका भूमि रिकॉर्ड की सही तरह से जांच न करने और अनुचित रूप से मुआवजा स्वीकृत करने के कारण जांच के दायरे में आई है। चारूमिता के निलंबन और दो तहसीलदारों के खिलाफ चार्जशीट जारी होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। सूत्रों के अनुसार, मोगा प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के और अधिकारी भी विजिलेंस जांच के घेरे में आ सकते हैं।