ऊना/सुशील पंडित: प्रैस विज्ञप्ति जारी करते हुए विनय शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के लगभग तीन वर्ष पूरे होने को हैं, लेकिन प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों को आज भी अपने अधिकारों के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
जहां केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश के 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनरों को राहत देने के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन कर 1 जनवरी 2026 से लागू करने का निर्णय लिया है, वहीं हिमाचल की कांग्रेस सरकार अपने कर्मचारियों को पिछले डीए, एरियर और वित्तीय लाभों से अब तक वंचित रखकर केवल राजनीतिक नाटक कर रही है। विनय शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार कर्मचारियों के साथ छल कर रही है विनय ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि वह कर्मचारियों को उनका हर बकाया समय पर देगी, ओल्ड पेंशन स्कीम को प्रभावी ढंग से लागू करेगी और महंगाई भत्ता समय पर देगी।
लेकिन हकीकत यह है कि 2023 और 2024 की डीए किश्तें अब तक लंबित हैं। एरियर का भुगतान सिर्फ घोषणाओं तक सीमित है। पेंशनरों के मेडिकल भत्ते और अन्य लाभ रोके गए हैं नई भर्ती प्रक्रिया में भी देरी की जा रही है, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है। कर्मचारी संगठनों के बार-बार ज्ञापन देने और धरनों के बावजूद सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। ओर वहीं केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुऐ विनय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह निर्णय कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होगा, देशभर के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। केंद्र सरकार लगातार कर्मचारियों के हित में काम कर रही है केंद्र सरकार द्वारा मंहगाई भत्ता (DA) को हर छह महीने में बढ़ाया जाता है। पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) भी समय पर दी जाती है। 7वें वेतन आयोग के बाद कर्मचारियों की आय और जीवनस्तर में सुधार आया है। इसी से स्पष्ट है कि भाजपा कर्मचारियों की हितैषी पार्टी है, जबकि कांग्रेस केवल वादे और भाषणों तक सीमित है।
वहीं हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा हिमाचल के कर्मचारी ठगे गए प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने अपने राजनीतिक प्रचार और वोट बैंक की राजनीति में तो हजारों करोड़ खर्च कर दिए, परंतु कर्मचारियों के वेतन, एरियर, पेंशन और भत्तों के भुगतान के लिए हमेशा खाली खजाना होने का बहाना बनाया। जब भी कर्मचारियों ने अपनी आवाज उठाई, सरकार ने उन्हें चुप कराने और दबाने का प्रयास किया। राज्य सरकार ने जिस प्रकार से वित्तीय अव्यवस्था फैलाई है, उससे आने वाले महीनों में वेतन और पेंशन वितरण पर भी और अधिक संकट खड़ा हो सकता है। विनय शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों की ताकत को कम न आँके कांग्रेस सरकार भाजपा यह स्पष्ट करना चाहती है कि कर्मचारी केवल वेतनभोगी नहीं, बल्कि प्रदेश की व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी उपेक्षा करना, विकास और प्रशासन— दोनों को कमजोर करना है। यदि सरकार ने शीघ्र ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो भाजपा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी और हर मंच पर कांग्रेस की इस वादाखिलाफी को उजागर करेगी। विनय शर्मा ने कहा कि यह कांग्रेस सरकार कर्मचारी विरोधी है जनता के प्रति गैरजिम्मेदार है विनय शर्मा ने कहा कि भाजपा हिमाचल प्रदेश कर्मचारियों के साथ है, और हर स्तर पर उनकी आवाज बनेगी।