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अमेरिका ने 50 युवाओं को किया डिपोर्ट, 25 घंटे तक बेड़ियों में रहे नौजवान

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अंबालाः अमेरिका ने एक बार फिर से भारतीय युवाओं को झटका दिया है। दरअसल, अवैध रूप से रह रहे हरियाणा के 50 युवकों को अमेरिका ने डिपोर्ट करके वापस भारत भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, इन सभी के हाथ-पैरों में बेड़ियां लगी हुई थीं। विमान शाम दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा और वहां से हरियाणा पुलिस इन युवकों को अपने साथ ले गई। बताया जा रहा हैकि सभी नौजवान डंकी के रास्ते अमेरिका गए थे। इनमें सबसे अधिक करनाल के 16 व कैथल के 14 युवक हैं। इनके अलावा कुरुक्षेत्र व अंबाला के 5-5, यमुनानगर के 4, जींद के 3, रोहतक व पानीपत का एक-एक युवक शामिल है। सभी की उम्र 18 से 42 साल के बीच है।

वहां छह महीने से लेकर डेढ़ साल तक विभिन्न जेलों में रहे और अब बेड़ियों में वतन लौटे हैं। इनमें अंबाला के जगोली गांव के हरजिंदर सिंह भी हैं, जो फ्लोरिडा के जैक्सन वेल में रसोइए की नौकरी करने गए थे। हरजिंदर ने अमेरिका पहुंचने के लिए अपने माता-पिता की मेहनत की कमाई, करीब 35 लाख रुपये, खर्च कर दिए थे। उन्हें विश्वास था कि वहां जाकर वह परिवार के लिए एक सुखद भविष्य बनाएंगे, लेकिन उनकी उम्मीदें और सपने वहीं टूटकर रह गए।

हरजिंदर सिंह ने बताया कि सभी को करीब 25 घंटे तक बेड़ियों में रखा गया, जिससे उनके पैरों में सूजन आ गई। इस बर्ताव ने हरजिंदर और उनके जैसे कई लोगों के लिए अमेरिका का सपना किसी बुरे अनुभव में बदल दिया। उन्होंने इस अमानवीय व्यवहार की निंदा की और भारतीय सरकार से मदद की गुहार लगाई है। कैथल के डीएसपी ललित ने बताया कि अधिकतर युवा एक से डेढ़ साल से अमेरिका में रह रहे थे। इन सभी को वीजा नियमों के उल्लंघन और अवैध प्रवास के कारण जेल में बंद किया हुआ था।

कैथल से डंकी रूट से गए करीब एक हजार युवा अब भी अमेरिका में हैं। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम की निगरानी में रविवार सुबह 11 बजे सभी को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इनके अपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। पुलिस पता लगाएगी कि ये लोग किस रूट से होते हुए पहुंचे थे। करनाल के डीएसपी संदीप कुमार ने प्रेसवार्ता कर बताया, सभी युवा युवा 40 से 70 लाख रुपये खर्च करके डंकी रूट से अमेरिका गए थे।

वहां उनको अस्थायी जेलों में रखा गया था। किसी ने अभी ट्रैवल एजेंट के खिलाफ शिकायत नहीं दी है। पानीपत के साहिल ने बताया कि 50 लाख रुपये खर्च करके वह 2024 में डंकी रूट से अमेरिका पहुंचा था। करीब नौ माह तक वह कैंप में रहा। रोहतक के गांव किलोई खास के सन्नी ने बताया कि वह मई 2024 में गया था। अब उसके परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है।

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