अलीगढ़: यूपी के अलीगढ़ में रेप से जुड़े 23 साल पुराने एक मामले में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए ना सिर्फ अपराध करने वाले, बल्कि अपराधियों का साथ देने वाले इंस्पेक्टर को भी दोषी मानते हुए सज़ा सुनाई गई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की अपर सत्र न्यायाधीश अंजू राजपूत की अदालत ने 7 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल की सजा सुनाई है।
दोषियों में दो पुलिसकर्मी (पूर्व सब-इंस्पेक्टरों) तत्कालीन विवेचक इंस्पेक्टर पुत्तू लाल प्रभाकर और दरोगा राम लाल भी शामिल हैं। अदालत ने सभी दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की 75 फीसदी राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया गया है। सभी दोषियों को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
एडीजीसी हर्षवर्धन सिंह के अनुसार, मामला 30 अक्टूबर 2002 का है। खैर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसकी 13 वर्षीय बेटी खेत पर गई थी और देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने शक के आधार पर साहब सिंह, रामेश्वर और प्रकाश के खिलाफ एफआईआर करवाई थी।
मामले की जांच तत्कालीन SHO पुत्तू लाल प्रभाकर को सौंपी गई। उन्होंने किशोरी को बोना और पप्पू नामक लोगों के पास से बरामद किया। लेकिन पुलिस ने पीड़िता के 164 के बयान दर्ज नहीं कराए गए। जिन तीन लोगों पर परिजनों ने शक जताया था, उनके नाम जांच से हटा दिए गए। केवल बोना और पप्पू के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
पुलिस की इस कार्यवाही से नाराज पीड़िता के परिजनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट के आदेश पर पीड़िता के 164 CrPC के बयान दर्ज हुए। उसने साहब सिंह, रामेश्वर, प्रकाश, दरोगा रामलाल, और चेयरमैन राकेश मौर्य पर बलात्कार का आरोप लगाया। बयान में बताया गया कि उसे राकेश मौर्य के गोदाम में ले जाकर रेप किया गया और फिर राकेश की गाड़ी से गांव छोड़ा गया।
दोबारा हाईकोर्ट जाने के बाद मामला CBCID को सौंपा गया। जांच के बाद साहब सिंह, रामेश्वर, प्रकाश, दरोगा राम लाल, चेयरमैन राकेश मौर्य, जयप्रकाश, खेमचंद, बॉबी और SHO पुत्तू लाल प्रभाकर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। ट्रायल के दौरान क्या हुआ? आरोपी राकेश मौर्य ने अपनी फाइल अलग करवा ली। साहब सिंह की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई। बाकी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला।