नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ का बम फाड़ दिया है। इसके कारण दोनों देशों में ट्रेड वार तेज हो गई है। 1 नवंबर से 100% का अतिरिक्त टैरिफ लागू हो जाएगा। इसके कारण अमेरिकी बाजार में चीनी उत्पादों पर कुल टैक्स दर करीबन 130% तक पहुंच जाएगा। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कदम को अनुचित और दोहरे मापदंड वाला बताया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि – हाई टैरिफ की धमकी देना चीन से संबंध सुधारने का सही तरीका नहीं है। हमारी स्थिति साफ है हम व्यापार युद्ध नहीं चाहते लेकिन हम इससे डरते भी नहीं हैं।
ट्रंप ने इस वजह से लगाया टैरिफ
राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर ज्यादा आक्रामक और शत्रुतापूर्ण व्यापार नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चीन ने हाल ही में रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इसके जवाब में ट्रंप की ओर से जरुरी सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लागू कर दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरुरी है।
चीन ने दी चेतावनी
अमेरिकी के इस कदम पर चीन ने चेतावनी दे दी है। चीन का कहना है कि अमेरिका ने अगर 100% टैरिफ लागू किया तो वैश्विक व्यापार व्यवस्था खराब हो जाएगी। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन को गंभीर तौर पर प्रभावित करेगा परंतु हम बातचीत के लिए तैयार हैं परंतु अमेरिकी को धमकियों वाली भाषा छोड़नी पड़ेगी।
भारत को होगा फायदा
अमेरिका और चीन के बढ़ते हुए व्यापार युद्ध से भारत को फायदा होगा। इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपना निर्यात बढ़ाने में फायदा मिलेगा। एक्सपर्ट्स से इस बात की जानकारी दी है कि अमेरिकी की ओर से चीन पर ज्यादा टैरिफ लगाने से मांग भारत की ओर आ जाएगी। भारत ने 2024-25 में अमेरिका को 86 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया है। इस वृद्धि से हमें फायदा हो सकता है। अमेरिका की ओर से 1 नवंबर से चीनी वस्तुओं पर 100% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की गई है। इससे चीनी आयात पर कुल शुल्क दर करीबन 130% हो जाएगा। यह कदम बीजिंग के 9 अक्टूबर के फैसले के जवाब में लिया गया है। इस कदम में दुर्लभ खनिज के निर्यात पर कड़े नए नियम लगाए गए हैं। ये दुर्लभ खनिज अमेरिकी रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन और साफ ऊर्जा उद्योगों के लिए बेहद जरुरी है।