नई दिल्ली: पाकिस्तान के लोग गरीबी, भुखमरी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में पड़ोसी देश ने एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से नए कर्ज के लिए गुहार लगाई है। आईएमएफ का मिशन पाकिस्तान में दो हफ्ते तक रहेगा और यह देखेगा कि क्या पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को सुधार कर रहा है। यदि मिशन को सुधार दिखेंगे तो ही उनकी ओर से पाकिस्तान को कर्ज दिया जाएगा।
पाकिस्तान के आर्थिक दल के साथ हुई बैठक
पाकिस्तान के एक अखबार ने बताया कि आईएमएफ के मिशन ने पाकिस्तान के आर्थिक दल के साथ एक औपचारिक बैठक भी की है। इसमें 7 अरब डालर का कर्ज और 1.1 अरब डॉलर की सुविधा के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई है। यह बैठक उस समय में हुई है जब जून 2025 के अंत तक कार्यक्रम का प्रदर्शन मिश्रित रहा है। आईएमएफ में पाकिस्तान के मिशन ईवा पेत्रोवा के नेतृत्व में दल ने वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब के नेतृत्व वाले पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से बीते दिन मुलाकात भी की।
इस बैठक में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गर्वनर, वित्त सचिव और संघीय राजस्व बोर्ड के चेयरमैन के साथ-साथ प्रमुख आर्थिक हित धारकों ने भी हिस्सा लिया। यह मिशन करीबन दो हफ्ते तक पाकिस्तान में रहेगा। इसके अंतर्गत सात अरब अमेरिकी डॉलर की विस्तारित वित्तपोषण सुविधा (EFF) और 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर की लचीली और स्थिर सुविधा के कामकाज की समीक्षा करेगा।
रिपोर्ट में यह बताया गया है कि पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ मिशन से यह कह दिया है कि वह बाढ़ में हुए नुकसान को भी ध्यान में रखें। सूत्रों ने कहा कि समीक्षा बाढ़ से पहले के लक्ष्यों पर आधारित है। इसके चलते सरकार जून-2025 के अंत तक प्रदर्शन को लेकर जवाबदेह भी होगी हालांकि बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर बाद में छूट देने पर विचार कर सकते हैं। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि यदि बैठक सकरात्मक होगी तो अगले महीने पाकिस्तान को करीबन 1 बिलियन डॉलर कर्ज दे दिया जाएगा।
मई में भी लिया था कर्ज
गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी साल मई में पाकिस्तान को आईएमएफ ने एक अरब डॉलर का कर्ज दिया था। आईएमएफ ने यह कर्ज देने से पहले पाकिस्तान के सामने कई शर्तें भी रखी थी। इन शर्तों में कार्बन लेवी भी शामिल था। इसके अलावा बिजली के शुल्क में भी समय-समय पर बदलाव और पानी की कीमतों को लेकर कई स्तरों पर सुधार की शर्तें भी इसमें शामिल थी।