पठानकोटः पहाड़ों में हो रही बारिश और बादल फटने के कारण पिछले दिनों बांधों की झीलें लबालब पानी से भर गई थीं। जिसके कारण बांध प्रशासन ने गेटों के माध्यम से पानी छोड़ दिया। जिससे रावी ने अपना रोद्र रूप दिखाते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों और सुजापुर के गांवों में व्यापक में घुसा और तबाही मचा दी। दरअसल, पानी का बहाव अधिक होने के कारण सिंचाई विभाग के कर्मचारी माधोपुर हेडवर्क्स के फ्लड गेट खोलने गए, जिनकी सुरक्षा के लिए विभागीय अधिकारियों ने उन्हें किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए और वह पानी के तेज बहाव में बह गए।
कर्मचारी गेट खोलने गए थे तो उस दौरान ना तो किसी प्रकार की बेल्ट पहनी हुई थी और ना ही कोई लाइफ सेवर जैकेट पहनी हुई थी। जिससे गिरने के बाद कर्मी को बचाया जा सके। सिंचाई विभाग के कर्मचारी जब रावी में गिरे तो वे उन्हें बचा नहीं पाए और वे टूटे हुए फ्लड गेट से लटके रहे और उनकी साँसें थम गईं। इस संबंध में जानकारी देते हुए विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि बाढ़ के दौरान हमारे कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की रक्षा करते हैं, लेकिन विभाग उनकी सुरक्षा के लिए कुछ नहीं करता।
जिसके परिणामस्वरूप आज उनका एक साथी उनसे बिछड़ गया। इस अवसर पर उन्होंने विभागीय अधिकारियों से माँग की कि उन्हें सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएँ ताकि कर्मचारियों की जान सुरक्षित रह सके। उधर, जब इस संबंध में कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारूचक से बात की गई तो उन्होंने इस घटना में मारे गए सिंचाई विभाग के कर्मचारी को 50 लोगों की जान बचाने वाला योद्धा बताया।