पठानकोटः जिले में स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों में इन दिनों रावी नदी के उफान के कारण भारी तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। हाल ही में आई बाढ़ से कई घर और दुकानें पानी में डूब गई हैं, जबकि हजारों एकड़ में फैली किसानों की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। कई परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं और बेघर हो चुके हैं। इस आपदा के बीच सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और सीमावर्ती इलाके के किसानों को झेलना पड़ा है, जिनकी फसलें और ज़मीनें रावी नदी की चपेट में आ गई हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते राज्य सरकार ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में सड़क सामग्री पहुंचाई जा रही है, ताकि गांवों तक राशन और आवश्यक सहायता सामग्री मुहैया कराई जा सके। इसके साथ ही सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भविष्य में संभावित खतरे को ध्यान में रखते रावी नदी के किनारों को भरने और मजबूत करने का काम शुरू कर दिया गया है। इसका मकसद यदि दोबारा नदी में पानी छोड़ा जाता है, तो आस-पास के गांव और खेत बाढ़ की चपेट में न आएं।
प्रशासन का कहना है कि राहत कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी और हर प्रभावित व्यक्ति तक मदद पहुंचाई जाएगी। सरकार ने किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू करने का आश्वासन दिया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की कि रावी नदी के किनारे स्थायी बांध और जल नियंत्रण प्रणाली बनाई जाए ताकि हर साल इस तरह की आपदा से बचा जा सके।