सिरमौरः जिले के मैदानी हिस्सों में इस बार खेतों से सुनहरी फसल नहीं, बल्कि मायूसी की लहर उठी है। मक्का और धान की फसल तेज बारिश और संभवतः बीज की खराब गुणवत्ता के कारण पीलापन पकड़ चुकी है। किसानों के मुताबिक, करीब आधी उपज खेतों में ही नष्ट हो गई और बाकी की बचने की उम्मीद कम है।
ग्रामीण किसान बताते हैं कि सालभर की मेहनत और निवेश अब पानी में बह गया। उनका पूरा जीवन-यापन मक्का, धान और गेहूं जैसी फसलों की बिक्री पर टिका है, लेकिन इस बार हालात ऐसे हैं कि बीज के कर्ज तक चुकाने के लाले पड़ गए हैं। किसान नेता तरसेम सगी ने कहा, “3 साल पहले भी यहां धान की 90% फसल बर्बाद हुई थी, लेकिन आज तक किसानों को एक रुपया मुआवजा नहीं मिला। सरकार सिर्फ कागजों में सहानुभूति दिखाती है, जमीन पर मदद कहीं नजर नहीं आती।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए तो अन्नदाता हताश होकर खेती छोड़ देगा और यह पूरे प्रदेश के लिए खाद्यान्न संकट की घंटी साबित होगा।
किसानों ने सर्वे करवा मुआवजा देने की मांग की
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करवाकर नुकसान का सटीक आंकलन किया जाए और तुरंत राहत राशि जारी की जाए। साथ ही, बीज की गुणवत्ता जांचने और मौसम से बचाव के लिए ठोस योजनाएं लागू की जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।