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कंवर अस्पताल में हिमोत्कर्ष महिला मंच ने स्तनपान को लेकर आयोजित की जागरूकता कार्यशाला

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माँ के दूध से बच्चों में पैदा होती रोगों से लडऩे की प्रतिरोधक क्षमता:डा.अमिशा सांभर 

माँ का दूध बच्चें के लिए अमृत: डॉ जगदीश्वर

ऊना/सुशील पंडित: विश्व स्तनपान जागरूकता सप्ताह के उपलक्ष्य में हिमोत्कर्ष महिला मंच व संयुक्ता चौधरी हिमोत्कर्ष महिला प्रशिक्षण संस्थान ऊना द्वारा कंवर मल्टी स्पैशियलिटी अस्पताल ऊना में जिला स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कंवर अस्पताल के एमडी व वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा.जगदीश्वर कंवर मुख्य अतिथि के रूप से उपस्थित हुए,जबकि डा.अमिशा सांभर  ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेते हुए महिलाओं को जागरूक किया। कार्यशाला में गर्भवती महिलाओं को संबोधित करते हुए डा. जगदीश्वर कंवर ने नवजात शिशुओं के लिए मां के दूध के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जच्चा का दूध बच्चे के लिए अमृत के सम्मान होता है। उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों को छह माह तक केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए। स्तनपान प्रत्येक बच्चे को जीवन की बेहतरीन शुरुआत में मददगार होता है। जन्म के 1 घंटे के भीतर शीघ्र स्तनपान शुरू करवाने से शिशु मृत्यु दर में कमी होती है। उन्होंने कहा कि बच्चे के जन्म लेने के साथ ही उसे शहद या अन्य कोई भी पदार्थ खिलाने से पहले उसे सबसे पहले मां का दूध पिलाना चाहिए। कार्यशाला में मुख्य वक्ता डा.अमिशा सांभर ने उपस्थित महिलाओं को स्तनपान के बारे में आवश्यक जानकारियां दी।

उन्होंने नवजात बच्चों की सेहत के लिए मां के दूध को रामबाण करार दिया। यह नवजात बच्चे को विभिन्न रोगों से लडऩे की क्षमता प्रदान करता है। वहीं, उसकी सेहत के लिए यह अत्यावश्यक है।  उन्होंने बताया कि 2 साल तक और उसके बाद भी स्तनपान जारी रखने से शिशु को उच्च गुणवत्ता वाले पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक ढंग से महिलाओं को समझाया कि किस प्रकार से गर्भवती महिलाओं में दूध बनता है व यह किस प्रकार से बच्चों के लिए लाभदायक है। उन्होंने गर्भ में पल रहे बच्चे से लेकर उसके जन्म तक मां के शरीर में आने वाले परिवर्तनों की जानकारी दी। वहीं,उन्होंने बताया कि किस प्रकार से स्तनपान मां और बच्चे के बीच में भावनात्मक रिश्ता पैदा करता है। स्तनपान बच्चे की कई संक्रामक रोगों से रक्षा करता है तथा इससे बच्चे की प्रतिरोधी क्षमता मजबूत होती है। नवजात के लिए माँ का दूध सबसे बेहतर है यह आसानी से पच जाता है। स्तनपान से शिशु को संतुलित पोषण, संक्रमण से बचाव तथा मानसिक व भावनात्मक रूप से संतुष्टि मिलती है। अगर माँ स्तनपान करवाती है तो इससे उसे भी काफी लाभ मिलता है जैसे स्तन व गर्भाशय के कैंसर से बचाव,प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव में कमी आना तथा परिवार नियोजन में सहायक होना व स्तनपान माँ और बच्चे के बीच स्वस्थ सम्बन्ध का निर्माण भी करता है।

डा.अमिशा संाभर ने गर्भवती महिलाओं को बच्चों को दूध पिलाते समय उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को दूध पिलाने के समय पौस्चर के बारे में भी बताया। इस अवसर पर हिमोत्कर्ष महिला मंच की वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनूपा ठाकुर ने कहा कि महिलाओं को अपने नवजात बच्चों को कम से कम छह माह तक केवल मां का दूध ही पिलाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को इस संबध में किसी प्रकार की भ्रांतियों में न पडऩे की भी सलाह दी। हिमोत्कर्ष महिला मंच की सदस्य मंजू मनकोटिया ने सबका स्वागत किया जबकि महिला मंच सदस्य रंजना जसवाल ने धन्यावाद प्रस्ताव पेश किया,वहीं प्रेस सचिव रमा कंवर ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम में हिमोत्कर्ष महिला मंच की वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनूपा ठाकुर,सदस्य रंजना जसवाल,मंजू मनकोटिया,रमा कंवर,हिमोत्कर्ष प्रशिक्षण  संस्थान की उपप्रधानाचार्य रंजू बाला,प्रशिक्षक मीना ठाकुर,निशा के अलावा 80 से अधिक महिलाएं उपस्थित थीं। कार्यशाला के दौरान महिला मंच सदस्यों ने चिक्तिसकों को पौधे भी भेंट किए।

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