फौजा सिंह के नाम पर रखा जाएगा स्कूल का नाम
जालंधर, ENS: दुनिया के सबसे उम्रदराज 114 साल के एथलीट फौजा सिंह की 14 जुलाई को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वहीं आज फौजा सिंह की अतिंम अरदास के लिए दोपहर 11.45 बजे अंखड पाठ गुरुद्वारा बाबा शहीदां समस्तपुर, जालंधर में रखा गया है। जिसके बाद गुरुद्वारा साहिब में 1 से 2 बजे तक अतिंम अरदास की जाएगी। वहीं आज अतिंम अरदास के उपरांत फौजा सिंह के परिवार द्वारा उनकी देसी घी की पंसदीदा गुड़ और अलसी की पिन्नीयां रखी गई है। वहीं मामले की जानकारी देते हुए किसान नेता हर सुलिदंर सिंह ने बताया कि आज फौजा सिंह की अतिंम अरदास के दौरान अलसी की पिन्नीयां रखी गई है।
उन्होंने कहा कि अलसी की पिन्नीयां और दाल रोटी उनकी पंसदीदा थी। इसी को लेकर फौजा सिंह की पसंद को लेकर आज अलसी की पिन्नीयां रखी गई है। उन्होंने कहाकि इसका उद्देश्य है कि अलसी की पिन्नी खाने से वह लंबी उम्र होने के बावजूद फिट थे। इस दौरान वह अपनी सेहत का भी ध्यान रखते थे। उन्होंने कहाकि युवा पीढ़ी को भी उनके द्वारा एक संदेश दिया जा रहा है। किसान नेता ने कहा कि आज फौजा सिंह की अंतिम अरदास में केंद्रिय मंत्री रवनीत बिट्टू सहित कई नेता श्रद्धाजंलि देने पहुंच रहे है। वहीं फौजा सिंह के नाम पर स्कूल का नाम रखने का फैसला लिया है। आप सरकार ने मास्टर एथलीट फौजा सिंह को मरणोपरांत उन्हें यह सम्मान दिया है।
फौजा सिंह के जालंधर स्थित उनके पैतृक गांव ब्यास में राजकीय स्कूल का नाम फौजा सिंह के नाम पर रखा जाएगा। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बेंस ने कहा कि अब तक पंजाब सरकार 115 सरकारी स्कूलों के नाम शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों, गदरी बाबों और पंजाब की नामवर हस्तियों के नाम पर रख चुकी है। अब इनके अलावा सूबे में 25 और सरकारी स्कूलों के नाम बदलने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बेंस ने कहा कि पंजाब की अगली पीढ़ियां प्रदेश के महान लोगों से रूबरू हों, इसलिए यह फैसला लिया गया है। जिन स्कूलों के नाम बदले जा चुके या बदले जा रहे, वहां शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों, गदरी बाबों और पंजाब की नामवर हस्तियों की तस्वीरें, उनकी पेटिंग व जीवनी लिखे पट्ट भी लगेंगे।
बता दें कि राज्यपाल कटारिया ने फौजा सिंह को शरीर पर अद्भुत आत्मविश्वास रखने वाला व्यक्ति बताया। अकाली दल के नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने उन्हें सिखों का एंबेसडर कहा। पंजाब सरकार के मंत्री मोहिंदर भगत ने कहा कि फौजा सिंह ने अपनी सादगी और संकल्प से देश को गर्व महसूस कराया है। फौजा सिंह की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और प्रशंसक शामिल हुए। वाहन पर रखे पार्थिव शरीर के साथ लोग पैदल चलते हुए श्मशान घाट तक पहुंचे। फौजा सिंह की प्रेरक जीवनगाथा, आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मिसाल बनी रहेगी।