Punjab Govt
HomeHimachalवशिष्ट पब्लिक स्कूल में अध्यापकों के लिए वर्कशॉप का आयोजन

वशिष्ट पब्लिक स्कूल में अध्यापकों के लिए वर्कशॉप का आयोजन

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now
ऊना/ सुशील पंडित : 5 मार्च को वशिष्ट पब्लिक स्कूल में अध्यापकों के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया गया। स्कूल में नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क स्कूल एजुकेशन के उद्देश्य पर एकदिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। यह वर्कशॉप अनुपमा शर्मा  और उनके सहयोगी अरुण मसीह के द्वारा ली गई। अनुपमा शर्मा 2002 से सीबीएसई में प्रशिक्षक के तौर पर अपनी सेवाएंँ दे रही हैं। इन्होंने सीबीएसई के पाठ्यक्रम नियोजन, सुविधा संगठन नेतृत्व, विकास और प्रशिक्षण मॉड्यूल में भी कार्य किया है। इन्हें डी.ए.वी कॉलेज प्रबंध समिति द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है तथा उनके सहयोगी अरुण मसीह बैपटिस्ट चंडीगढ़ स्कूल में प्रिंसिपल है।
 वह वर्तमान में सीबीएसई के रिसोर्स पर्सन है और सीबीएसई स्कॉफ मॉडयूल और क्षमता निर्माण कार्यक्रम विकसित करने के प्रतिबद्ध सदस्य भी हैं।
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा का उद्देश्य शिक्षा को केवल परीक्षा उन्मुख बनाने के बजाय छात्रों के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित करना है ताकि वे एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें। नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क स्कूल एजुकेशन के अनुसार विद्यालय शिक्षा के उद्देश्य शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देना है। विद्यार्थियों में तार्किक सोच, समस्या समाधान, रचनात्मक और व्यावहारिक ज्ञान और कौशल में वृद्धि करना है। अनुपमा ने बताया कि शिक्षण के उद्देश्य और अधिगम मानकों को निम्नलिखित दृष्टिकोणों के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सीखने की स्वाभाविक क्षमता को प्रोत्साहित करना चाहिए। अरुण मसीह ने बताया कि मूलभूत चरण (उम्र 3 से 8 ) के छात्रों को मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल का विकास, खेल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन, सामाजिक- भावनात्मक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।
प्रारंभिक चरण (8 से 11 )भाषा कौशल के विकास पर जोर देना है। गणित और विज्ञान की प्रारंभिक अवधारणाओं का परिचय करवाना है और रचनात्मक एवं आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करना है। मध्य चरण (11से14 )मुख्य बिंदुओं की समझ को मजबूत करना है। व्यावसायिक शिक्षा  का परिचय और अंततः विषय शिक्षा को बढ़ावा देना है। माध्यमिक चरण (उम्र  14 से 18) विषय चयन में अधिक लचीलापन प्रदान करना, छात्रों को शिक्षा और व्यावसायिक करियर के लिए तैयार करना है। छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने बताया कि शिक्षक प्रौद्योगिकी में आईसीटी का उपयोग स्कूल शिक्षा में शिक्षण अधिगम प्रकिया को आधुनिक, प्रभावी और समावेशी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। स्कूल के प्रधानाचार्य दीपक कौशल ने अनुपमा और अरुण मसीह का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि हम आगामी सत्र में नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए छात्रों के समग्र विकास के लिए कार्य करेंगे।

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -
Punjab Govt

Latest News

- Advertisement -
- Advertisement -