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स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं बन रही आर्थिक रूप से मजबूत

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महिलाओं की आर्थिकी सुदृढ़ करने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का योगदान

ऊना/सुशील पंडित : ऊना जिले में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी)से जुड़कर अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ कर रही हैं। समूह की महिलाएं विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे आचार, सेपू और मसाला बड़ियां, पापड़, हल्दी, शहद, बडियां, काली गेहूं का दलिया, आटा, चटनी, प्राकृतिक मक्की का आटा सहित अन्य उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद तैयार करती हैं जो न केवल खाने में स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर हैं। स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित किए गए उत्पादों की मांग लगातार बाजार में बढती जा रही है जिससे महिलाओं की आर्थिकी में महत्वूपर्ण सुधार हो रहा है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को न केवल स्थानीय बाजार बल्कि बाहरी राज्यों में भी बेचा जाता हैं। समूहों के उत्पादों को ग्रामीण स्तर पर हिमईरा शाॅप के साथ-साथ जिला, राज्य और बाहरी पड़ोसी राज्यों में आयोजित होने वाले मेलों में भी प्रदर्शित किया जाता है। इससे महिलाओं को अपनी मेहनत का अच्छा मूल्य प्राप्त हो रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।
राधे कृष्णा समूह की सफलता की कहानी
ग्राम पंचायत टकारला से राधे कृष्ण समूह की नीलम देवी बताती हैं कि वर्ष 2011 में एनआरएलएम के माध्यम से 10 महिलाओं ने इस समूह से जुड़ने का निर्णय लिया था। शुरूआत में वे अपनी बचत के पैसों को बैंक में जमा करवाती थी। लेकिन समूह के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से कम ब्याज दरों पर 5 लाख रूपये का लोन तथा 15 हजार रूपये का रिवाॅल्विंग फंड प्राप्त हुआ था। नीलम देवी ने बताया कि समूह ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से भी पंजीकरण करवाया है ताकि उनके उत्पादों की गुणवता पर कोई सवाल न उठे और विक्रय करने में आसानी रहे। समूह द्वारा तैयार उत्पादों को दिल्ली, गुडगांव, चंडीगढ़ और देहरादून जैसे शहरों में भी बेचा जाता है जिससे उनकी आय में काफी बढ़ौत्तरी हुई है। समूह के माध्यम से हुए मुनाफे से उन्होंने अपने पति को दुकान का कारोबार खोला है तथा दो बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्च भी समूह के माध्यम से अर्जित हुई आय से हो रहा है।
क्या कहती है समूह की सचिव
राधे कृष्णा समूह की सचिव जीवन लता कहती हैं कि समूह ने 20 रुपये की बचत राशि से समूह चलाना शुरू किया था। कुछ समय बाद बैंक लोन और रिवॉल्विंग फंड से महिलाओं ने गाय-भैंस खरीद कर दूध, दही, पनीर और घी के जरिए अपनी आजीविका कमाना आरंभ किया था। उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रदर्शित किए गए उत्पादों से समूह को लगभग 2 लाख के करीब आय अर्जित हुई है। इसके अलावा प्रदेश में आयोजित होते हुए सार्स मेलों में लगभग डेढ़-डेढ़ लाख रूपये की इनकम राधे कृष्णा समूह को प्राप्त हुई जिससे उनका मनोबल बढ़ा और इस कार्य को आगे ले जाने के लिए प्रोत्साहन मिला। इसके अलावा समूह द्वारा अब मोमोज और सिड्डू बनाने का जल्द शुरू किया जाएगा।
प्रशिक्षण और सरकारी समर्थन
नीलम बताती है कि विभाग द्वारा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मशोबरा में प्रशिक्षण दिया गया है जिससे वे अपने उत्पादों की गुणवत्ता  को और बेहतर बना सकें। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा भी एनआरएलएम के तहत समूह को अच्छा कार्य करने के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से वर्ष 2024 में लखपति दीदी प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया है।
समाज के लिए प्रेरणा
नीलम देवी ने अन्य महिलाओं से आग्रह किया है कि वे भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर अपनी आर्थिकी मजबूत करें और अपने परिवार का भरण-पोषण में मदद करें। यह न केवल महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है बल्कि ग्रामीण विकास में भी अहम भूमिका निभाने का अवसर है।
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से संबल और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित बनाने के लिए अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है ताकि वे भी आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकें।

परियोजना अधिकारी डीआरडीए ऊना केएल वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिशा-निर्देशानुसार महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं ताकि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके। वर्तमान में ऊना जिला में कुल 2788 स्वयं सहायता समूह कार्य कर रहे हैं जिन्हें अब तक 9.85 करोड़ रूपये की राशि स्टार्ट अप फंड, रिवाॅल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश फंड से प्रदान की जा चुकी है।

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